गंगाजल में स्वयं को शुद्व करने की क्षमता

हरिद्वार। भारत जागृति मिशन के अध्यक्ष अंशुल श्रीकुंज ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान माँ गंगा के जल की गुणवत्ता स्पष्ट रूप से बता रही है कि गंगा जल में स्वयं को शुद्ध करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि गंगा प्रेमी सरकार से बार बार ये माँग करते रहे हैं कि यदि वो गंगा को अविरल बहने दे तो गंगा जल स्वयं प्रदूषण मुक्त हो जाएगा। लेकिन दुर्भाग्यवश सरकारें इस तथ्य की उपेक्षा करती रही हैं। अंशुल ने कहा कि जर्मनी के वैज्ञानिक शॉ वर्गर ने अपनी पुस्तक द लिविंग वॉटर में करीब चालीस वर्ष पूर्व लिखा था कि गंगा जल में स्वयं को शुद्ध करने की शक्ति है। बशर्ते उसको अबाध बहने दिया जाए। अंशुल ने कहा की लॉकडाउन के दौरान उद्गम से नीचे तक की सभी विद्युत परियोजनाएँ आंशिक या पूर्ण रूप से बंद हैं। इसलिए गंगा जल खुद को प्राकृतिक रूप से प्रदूषण मुक्त बना रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नममि गंगे के तहत हजारों करोड़ खर्च कर चुकी है। गंगा जल उतना साफ पहले कभी नही दिखा जितना आजकल देखा जा रहा है। यानी सरकार द्वारा इतनी धनराशि व्यय करने पर भी आम दिनो में मलजल व औद्योगिक कचरा गंगा जल में गिर रहा है। अंशुल ने कहा की सरकार गंगा भक्तों पर बस यही उपकार कर दे की वो गंगा जल को अविरल बहने दे। माँ गंगा अपने जल को स्वयं शुद्ध कर लेंगी। इसका साक्षात प्रमाण आजकल गंगा जल धारा की गुणवत्ता से मिल रहा है।