श्रमिक संगठनों ने प्रधानमंत्री से की श्रम कानून में संशोधन वापस लेने की मांग

हरिद्वार। भेल के विभिन्न श्रमिक संगठनों ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री को सात सूत्रीय ज्ञापन प्रेषित कर राज्यों द्वारा श्रम कानूनों में किए गए संशोधनों को वापस लेने सहित विभिन्न समस्याओं का समाधान किए जाने की मांग की है।  ज्ञापन में भेल कर्मचारियों के एलांउस में की जा रही कटौती को तत्काल वापस लेने, महंगाई भत्ते पर लगी रोक को हटाने, सार्वजनिक एवं सरकारी संस्थानों के निजीकरण, निगमीकरण तथा निवेशीकरण की नीति को समाप्त करने, कुछ राज्य सरकारों द्वारा श्रम कानूनों में किए गए संशोधनों को निरस्त कर श्रम कानूनों को कड़ाई से लागू करने, कारखानों में श्रमिकों की कार्यावधि पूर्व की भांति आठ घंटे करने, बेरोजगार श्रमिकों को पांच हजार रूपए प्रतिमाह गुजारा भत्ते सहित लाॅकडाउन के कारण पैदल गांवों लौटने के दौरान हादसों में मारे गए श्रमिकों के परिवारों को 10 लाख मुआवजा दिए जाने की मांग की गयी है। प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में श्रमिक यूनियनों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि कोरोना महामारी के कारण किए गए देशव्यापी लाॅकडाउन में श्रमिक वर्ग को रोजगार का संकट, भूख, बदहाली, छंटनी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। उद्योगपति व ठेकेदार श्रमिकों को लाॅकडाउन अवधि का वेतन नहीं दे रहे हैं। पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों के वेतन में भारी कटोती की जा रही है। जिससे श्रमिकों को भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन सौंपने वालों में बीएमएस हीप के महामंत्री संदीप कुमार, विकास सिंह, मोहित शर्मा, अमित चैहान, पवन कुमार, अरविन्द कुमार, आशीष सैनी, रविन्द्र कुमार, जय शंकर, अमित गोगना आदि श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।