कथा श्रवण की सार्थकता तब जब जीवन व्यवहार में धारण करे- हरितोष एकल्वय

हरिद्वार। ब्रह्मरात सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में ज्वालापुर के पांडेवाला स्थित श्रीजी बेंकट हाॅल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं को कथा श्रवण कराते हुए बाल कथा व्यास पंडित ब्रह्मरात हरितोष एकल्वय ने कहा कि कथा श्रवण की सार्थकता तब ही सिद्ध होती है। जब इसे अपने जीवन व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हुए जीवन को आनंदमय, मंगलमय बनाकर अपना आत्म कल्याण करें। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शंाति व मुक्ति मिलती है। श्रीमदभागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। श्रीमद्भागवत कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है। कथा मुख्य यजमान प्रदीप शर्मा, श्रीमोहन अधिकारी प प्रमोद शर्मा ने कहा कि भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत मोक्षदायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में भी इसके प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं। श्रीमदभागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति प्राप्त होती है। सत्संग व कथा के श्रवण से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है, वरना वह इस संसार में आकर मोहमाया के चक्कर में पड़ जाता है। इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर नीरज गिरी, टीनू राणा, राजन सन्नी, बिन्नु, करण अधिकारी, संजीव गुप्ता, आलोक हरितोष, कौशल शर्मा, कपिल हरितोष आदि सहित बड़ी में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए मौजूद रहे। 


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