Skip to main content

औद्योगिक क्षेत्र में संतो को आमत्रित कर आर्थिक विकास के साथ आध्यात्मिक होगा मंथन


 हरिद्वार। उत्तराखंड की सिडकुल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने उद्योगों में आध्यात्मिक और वैचारिक माहौल बनाने के लिए एक नई पहल की है। देश के शीर्ष संतो को सिडकुल में स्थापित उद्योगों में आमंत्रित कर उनके साथ आध्यात्मिक मंथन किया जाएगा, ताकि उद्योगों का वातावरण आर्थिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक विकास की ओर किया जा सके और नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की जा सके। इस सिलसिले में रविवार को इस नई पहल का शुभारंभ करते हुए सिडकुल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र गर्ग के नेतृत्व में कनखल स्थित जगद्गुरु आश्रम में शंकराचार्य स्वामी श्री राजराजेश्वराश्रम महाराज से भेंट कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम से भेंट करने वालों में एसोसिएशन के संरक्षक जगदीश लाल पाहवा महेंद्र आहूजा उपाध्यक्ष अनिल शर्मा और सचिव सुयश वालिया शामिल थे। इस अवसर पर शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने कहा कि उत्तराखंड के आर्थिक विकास में सिडकुल के उद्योगों का महत्वपूर्ण योगदान है जिसे किसी भी सूरत में कम नहीं आंका जा सकता। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन की संतो से भेंट कर उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करने और आध्यात्मिक चिंतन मनन मंथन करने की पहल सराहनीय है। उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक चिंतन मंथन समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने सिडकुल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों की पहल पर उन्हें साधुवाद दिया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शंकराचार्य को शॉल भेट कर और माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया। शंकराचार्य ने एसोसिएशन के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों को अंग वस्त्र भेंट कर उन्हें आशीर्वाद दिया। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र गर्ग ने कहा कि महाराज श्री को जल्दी सिडकुल में आमंत्रित किया जाएगा। उनसे सभी उद्योगपति अधिकारी और कर्मचारी आध्यात्मिक चिंतन कर मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे। इस तरह उद्योगों और आध्यात्मिक जगत की हस्तियों के बीच आध्यात्मिक चिंतन मनन और मंथन का दौर शुरू होगा।


Comments

Popular posts from this blog

गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक