Skip to main content

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच डॉ पंडित शिवकुमार शर्मा की अस्थियां गंगा में प्रवाहित

 हरिद्वार। श्री सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व विधायक समाजसेवी डॉ पंडित शिवकुमार शर्मा की अस्थियां आज सती घाट कनखल में वैदिक विधि विधान के साथ गंगा में विसर्जित की गई। उनके छोटे भाई डॉक्टर देशबंधु और उनके बेटे राघव शर्मा ने वैदिक मंत्रोचार के मध्य गंगा में उनकी अस्थियां प्रवाहित की। इस अवसर पर उनके तीर्थ पुरोहित पंडित प्रदीप झा ने अस्थि विसर्जन की क्रिया को संपन्न कराया। उनकी अस्थियां हिमाचल प्रदेश के पालमपुर से बीती रात हरिद्वार के सप्त ऋषि आश्रम में पहुंची थी सती घाट में गंगा में अस्थि विसर्जन से पूर्व सप्त ऋषि आश्रम में उनके अस्थि कलश को दर्शनार्थ रखा गया जहां पर लोगों ने उनके अस्थि कलश पर पुष्पांजलि अर्पित की और जगदेव सिंह संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों ने गीता पाठ किया। सती घाट कनखल में गंगा में अस्थि विसर्जन के समय श्री मिथिलेश सनातन धर्म इंटर कॉलेज कनखल हरिद्वार के प्रबंधक पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी,महावीर दल गीता भवन के प्रभारी सुभाष सिंह घई ,कॉलेज की प्रधानाचार्य श्रीमती मीनाक्षी शर्मा, जगदेव सिंह संस्कृत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य पंडित राजेंद्र गोनियाल,वरिष्ठ शिक्षक राजीव पंत,तीर्थ पुरोहित सभा कनखल के अध्यक्ष पंडित जितेंद्र शास्त्री, संकल्प गुप्ता,उमेश कुमार,सप्त ऋषि आश्रम के प्रबंधक विनोद सैनी, गोपाल दत्त जोशी,भारतेंदु कौशल,गोविंद, गंभीर सिंह राणा आदि उपस्थित थे। सभी ने अस्थि कलश में पुष्पांजलि अर्पित की।


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक