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पांच दिवसीय फेकल्टी डेवलमेंट प्रोगाम का किया गया आयोजन


 देहरादून। स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस, यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जीस्टडीज, देहरादून में एआईसीटीई ट्रेनिंग एंड लर्निंग (अटल) अकादमी द्वारा प्रायोजित 5 दिवसीय फेकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्घाटन वर्चुअल मोड पर एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो अनिल डी̈ हसबुद्धे ने किया। यूपी एसईएस की ओर से कुलपति प्रो (डॉ) सुनीलराय ने देशभर के सभी 97 प्रतिभागियो ंका स्वागत किया और आयोजन समिति को बधाई दी। प्रो (डॉ) टीपीसिंह, इस एफउीपी के समन्वयक और विभाग के प्रमुख, स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस, यूपीईएस ने इस एफउीपी के विषय के बारे में जानकारी दी जो ‘‘सामाजिक परिवर्तनों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियांः एक३६०-डिग्रीव्यू‘‘ है। उन्होंने सामाजिक परिवर्तन में प्रौद्योगिकी के महत्व पर जोर दिया। इन 5 दिनों की एफउीपीमें आईआईटी पटना, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली आदि प्रतिष्ठित संगठनों के प्रख्यात वक्ताओं द्वारा 15 व्याख्यान श्रृंखलाएं दी गई थीं।एफडीपी के दौरान प्रख्यात वक्ताओं ने जैसे प्रो. (डॉ.) एम.पी. सिंह, आगरा विश्वविद्यालय, आधुनिक समाज में डिजिटलीकरण की भूमिका पर जोर दिया। प्रो. (डॉ.) सुरैया जबिन ने डिजीटल समाज में अत्याधुनिक तकनीकों पर चर्चा की। जामिया के डॉ. मनसफ आलम ने एआई में हेल्थकेयर पर बात की। जबकि डॉ अमिताभ चैधरी ने औद्योगिक डेटा पर तंत्रिका नेटवर्क के व्यावहारिक अनुप्रयोग का प्रदर्शन किया है। डॉ. पार्थपकरे ने मशीन लर्निंग का उपयोग करते हुए सामाजिक मुद्दों के बारे में बात की है। डॉ. गिरीश शर्मा, बीपीआइ टी नईदिल्ली द्वारा स्वास्थ्य सेवा के डिजिटलीकरण मेंतेजी लाने के लिए ब्लॉक चेन आधारित स्वास्थ्य सेवा पर चर्चा की गई। डॉ अमलान चक्रवर्ती, कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता दुनिया को कैसे बदल रही है, इस पर व्याख्यान दिया गया। डॉ बिनोद कुमार सिंह, एनआईटी जमशेदपुर द्वारा सामाजिक मुद्दों के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग और सुरक्षा पर एक सत्र आयोजित किया गया है।डॉ. प्रदीप तोमर, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा ने डिजिटल शिक्षा और डिजीटल समाज के निर्माण की दिशा में इसके महत्व पर जोर दिया। डॉराजीव मिश्रा, आईआईटी पटना ने डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर ग्रामीण समाज के परिवर्तन की दिशा में एक मार्ग दिखाया। डॉ. विनय कुमार, एनआईटी जमशेदपुर ने ग्राहक अनुभव पर आभासी, संवर्धित और मिश्रित वास्तविकता प्रौद्योगिकियों के प्रभाव को दर्शाया। डॉ स्नेहांशु पाल, एनआईटी राउरकेला ने उद्योग स्वचालन 4.0 के बारे में बात की। डॉ. अरिंदम विश्वास, काजी नजरूल विश्वविद्यालय, आसनसोल, पश्चिम बंगाल ने सामाजिक मुद्दों के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स की प्रयोज्यता के बारे मे ंबताया। अंत में, एफउीपी का समापन डॉ. टी.पी.सिंह यूपी देहरादून द्वारा मूल्यांकन, प्रतिक्रिया और समापन सत्र के साथ हुआ। इस एफउीपी को सफल बनाने के लिए अभिजीत कुमार, दीपकशर्मा और डॉ अमित सिंह ने सराहनीय प्रयास किया है।


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