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योग का आधार तन और मन की शुद्धता: डॉ. चिन्मय पण्ड्या


 हरिद्वार।देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान एवं आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में योगोत्सव का आयोजन किया गया। घर-घर पहुंचे प्रज्ञा योग, देश अपना बने निरोग की थीम को लेकर इस कार्यक्रम को किया गया। देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा योगोत्सव का यह कार्यक्रम योग दिवस के उपलक्ष्य में योग प्रोटोकॉल अभ्यास के तहत कराया गया। कार्यक्रम का आयोजन हरिद्वार के ही चैधरी चरण सिंह घाट पर किया गया। देश के अमृत महोत्सव और शांतिकुंज की स्वर्ण जयंती वर्ष के बीच इस योगोत्सव कार्यक्रम के माध्यम से लोगों में जनजागरूकता के साथ अपनी संस्कृति को भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया।योगोत्सव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देसंविवि कुलपति आदरणीय शरद पारधी जी ने कहा कि आज हमें मिलकर आजादी के अमृत महोत्सव के शुभ अवसर पर अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है और देव संस्कृति विश्वविद्यालय इसके लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। प्रतिकुलपति  डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यदि हमारा तन शुद्ध हो, मन-कर्म शुद्ध हो, यही योग का आधार है। उन्होंने कहा कि योगोत्सव के माध्यम से अपनी मानवता की मूल भावना को अपने जीवन मे लाने का प्रयास किया जाय। इस पूरे आयोजन की अध्यक्षता योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश बरनवाल जी ने की। इस आयोजन में देसंविवि के अनेक योग प्रशिक्षक एवं शांतिकुंज के योग प्रशिक्षु उपस्थित रहे।


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