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गु.काविवि के योग विभागाध्याच्क्ष को किया सम्मानित

हरिद्वार।  उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय योग विज्ञान विभाग द्वारा एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग के  विभागाध्यक्ष प्रो. ईश्वर भारद्वाज को योग शिक्षा एवं प्रसार में किए गए विशेष योगदान के लिए स.वि .वि. के कुलपति प्रो.देवी प्रसाद त्रिपाठी और योग विज्ञान विभाग ने सम्मानित किया। सम्मान पत्र भेंट करते हुए कुलपति देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षण में सिद्धांत की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और प्रो. ईश्वर भारद्वाज का योगदान योग के सिद्धांत क्षेत्र में काफी रहा है। योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.कामाख्या कुमार ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग के स्थापना में प्रो.भारद्वाज का महति योगदान रहा है और अभी तक भी उनका योगदान मिलता रहा है। भविष्य में भी विश्वविद्यालय और छात्र छात्राओं को उनके प्रतिभा का लाभ मिलता रहे। डॉ लक्ष्मी नारायण जोशी ने कहा कि प्रो.भारद्वाज योग क्षेत्र के दादा गुरु कहे जाते हैं जिनका देश और प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में योग शिक्षा को स्थापित करने में महती योगदान रहा है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए प्रो.भारद्वाज को बधाई शुभकामनाएँ दी इस अवसर पर संस्कृत शिक्षा निदेशक शिव प्रसाद खाली ,योग प्रशिक्षक राजेंद्र नौटियाल ,शोध छात्र शिवचरण नौडियाल,मोहित लोहान आदि उपस्थित रहे।


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ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

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आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक