दुर्लभ प्रकार के फूलों द्वारा भगवान आशुतोष का श्रंग्रार कर रूद्राभिषेक किया

हरिद्वार। नीलगिरी पर्वत स्थित स्वंयभू नीलेश्वर महादेव मंदिर में सावन के आखिरी सोमवार को 1100 दीपों की श्रंखला बनायी गयी व दुर्लभ प्रकार के फूलों द्वारा भगवान आशुतोष का श्रंग्रार कर रूद्राभिषेक किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए नीलेश्वर महादेव मंदिर के परमाध्यक्ष महंत प्रेमदास महाराज ने कहा कि भगवान शिव को समर्पित श्रावण मास में शिव आराधना से व्यक्ति के घर में सुख समृद्धि का वास होता है। यश, कीर्ति, वैभव को पाकर व्यक्ति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। भक्तों की सूक्ष्म आराधना से से ही प्रसन्न होकर भोलेनाथ भक्तों को मनवांछित फल प्रदान कर उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ स्वयंभू हैं। जो जन्म व मृत्यु से परे हैं। जो सौम्य रूप एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं और अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं। जो श्रद्धालु भक्त महादेव की शरण मं आ जाते हैं। उनका कल्याण स्वयं ही हो जाता है। महंत प्रेमदास महाराज ने कहा कि सम्पूर्ण सृष्टि शिवमय है। मनुष्य अपने कर्मानुसार फल पाते हैं। उन्होंने कहा कि शिव अनादि हैं। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड शिव के अंदर समाया हुआ है। नीलेश्वर महादेव मंदिर में जो भक्त नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना करते है। उनके जीवन की दरिद्रता दूर होकर जीवन उन्नति की ओर अग्रसर रहता है।