प्रतीकात्मक रूप से मनाया गया मौहर्रम

हरिद्वार। इमाम हुसैन की शहादत की याद में उपनगरी ज्वालापुर के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में ताजियों को भव्य रूप से तैयार कर मुस्लिम अकीदतमंदों के लिए रखा गया। सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए मुस्लिम समाज के लोगों ने ताजियों को बाहर तो रखा लेकिन जुलूस की शक्ल में नहीं निकाल पाए। लोगों द्वारा करबला के युद्ध को ताजा करने के लिए लाठी डंडों व तलवार, बरेटी आदि का खेल भी नहीं हो सका। जगह जगह भव्य रूप से सजाए गए ताजियों को लोगों के दर्शन के लिए रखा गया। काफी अर्से से मंसूरियों की बैठक पर भव्य रूप से ताजिए को तैयार कर रखा जाता है। अकीदतमंदों द्वारा शासन प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए सूक्ष्म रूप से ताजेदारी की गयी। लोगों द्वारा घरों में कलाम पाक की तिलावत, मर्सिया व गरीब मिसकीनों को लंगर तकसीम सुबह से ही उपनगरी के विभिन्न क्षेत्रों में किया गया। हाजी नईम कुरैशी ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत की याद को ताजा करने के लिए ताजियों को तैयार किया जाता है। प्रशासन के आदेशों का पालन करते हुए इस बार ताजियों को जुलूस की शक्ल में नहीं निकाला गया। लोगों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी किया गया। उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब के छोटे नवासे हजरत इमाम हुसैन ने करबला में 72 जांनिसारों के साथ शहादत दी थी। इसलिए इस माह को गमो का माह भी कहते हैं। खुदा ताला की इबादत, नमाज, कुरान पाक की तिलावत व ज्यादा से ज्यादा लोगों को लंगर तकसीम करना चाहिए। हाजी इरफान अंसारी व हाजी शहाबुददीन अंसारी ने कहा कि इमाम हुसैन ने इमान की खातिर अपने प्राणों की आहुति देकर इस्लाम को जिंदा रखा। उनके आदर्शो को अपनाकर इंसानियत का पैगाम देते रहें। गरीब असहाय निर्धन परिवारों की मदद करने में कोई कोर कसर ना छोड़ें। उन्होंने कहा कि सरकार के दिशा निर्देशों का पालन अकीदतमंदों द्वारा किया गया। मौहल्ला मैदानियान में भव्य रूप से ताजियों को लोगों के दर्शनों के लिए रखा गया। गुलजार, शमीम, अनीस, सागर, फुरकान अंसारी आदि के द्वारा मुंह पर मास्कर लगाकर ताजिए तैयार किए गए। पीरजीयों वाली गली में अनीस पीरजी व उनकी टीम के भव्य ताजिए को रखा गया। कोटरवान में अखाड़ा इमदाद खां द्वारा फकीरा खान की देखरेख में ताजिए को रखा गया। छोटे छोटेे बच्चों द्वारा भी ताजियों को तैयार कर अपनी भावना को दर्शाया। घर घर में लंगर तकसीम किए गए।