शाकाहार एवं प्रकृति की गोद में स्वाभाविक जीवन जीना सबसे उत्तम-वेदव्रत

गुकाविवि कें कम्प्यूटर विज्ञान विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित


हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में कम्प्यूटर विज्ञान विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार में गुजरात के राज्यपाल वेदव्रत ने कहा कि शाकाहार एवं प्रकृति की गोद में स्वाभाविक जीवन जीना सबसे उत्तम है। उन्होंने शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के रोगों के निर्मूलन के उपाय तथा अंकुरित अन्न, फल, कन्द, मूल का सेवन तथा जैविक कृषि के महत्व को समझाया। राज्यपाल ने कहा कि कोविड-19 जैसी बीमारियों से बचने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को निरन्तर बढ़ाने के लिए उपरोक्त साधनों के महत्व को प्रतिपादित किया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डा. सत्यपाल सिंह ने कहा कि हमें आहार-विहार एवं युक्त चेष्टाएं करनी चाहिए। यह सब सुख-शान्ति का मूल है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो, रूपकिशोर शास्त्री ने कहा कि सब प्रकार के रोगों के शमन का उपाय योग एवं आयुर्वेद है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिनेश चंद्र भट्ट ने कोविड 19 में वेद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय पर किये जा रहे वेबिनार की सफलता की कामना की तथा इस महामारी में हो रहे बदलावों को अवसर में बदलने के उपायों पर प्रकाश डाला। आईआईटी हैदराबाद के प्रो. शत्रुंजय रावत ने कहा कि भारतीय दर्शनों को उद्धृत करते हुए मोक्ष की ओर ले जाने वाली तकनीकी विद्या ही उत्तम विद्या है। डा. ओपी पाण्डेय ने प्रकृति प्रेम तथा आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर प्रकाश डाला। वेबिनार के संयोजक डा. श्वेतांक आर्य ने कहा कि वेबिनार करने का मूल उद्देश्य यह था कि वेद और विज्ञान एक दूसरे के पर्याय है। वर्तमान में कोविड-19 की महामारी पूरे विश्व को अपनी चपेट में लिए हुए हैं। इसके समाधान के लिए वेबिनार में लोगों के विचार और समाधान खोजना अत्यन्त आवश्यक है।वेद विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो दिनेशचन्द्र शास्त्री ने कहा कि वेद की मीमांसा को समझना है तो वेदों का अध्ययन करना जरूरी है। डा. दीनदयाल वेदालंकार ने कहा कि विभिन्न राज्यों के शोधार्थी कोविड-19 वेद और विज्ञान को लेकर कार्य कर रहे हैं। कम्प्यूटर विज्ञान विभाग के प्रो. कर्मजीत भाटिया, डा. सुहास, डा. महेन्द्र सिंह असवाल, डा. कृष्ण कुमार, डा दीन दयाल ने भी प्रतिभाग किया।