तन, मन व जीवन को सँवारने के लिए अपनाएं योग-स्वामी रामदेव

हरिद्वार। पतंजलि विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, शिक्षा मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित पांच दिवसीय वेबगोष्ठी के द्वितीय दिवस का प्रारम्भ दिव्य गायत्री मन्त्र से हुआ। इसके पश्चात् विश्व के समग्र स्वास्थ्य के लिए अर्हनिश कार्य करने वाले विश्वगुरू एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव द्वारा संगीतमय कपालभाति का अभ्यास कराया गया। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने तन, मन व जीवन को सँवारने के लिए योग मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी। विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने इस अवसर पर देशभर से जुडे विद्वतजनों एवं प्रतिभागियोें का मार्गदर्शन किया। इस वेबगोष्ठी के द्वितीय दिवस की अध्यक्षता वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष प्रो.अवनीश कुमार द्वारा एवं सह-अध्यक्षता पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रो.महावीर अग्रवाल द्वारा की गयी। उन्होने कहा कि पातंजल योगसूत्र के मंथन से जो रत्न निकलेंगे वह मानवता के लिए लाभकारी साबित होंगे। आज के प्रथम तकनीकी सत्र को सम्बोधित करते हुए मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली के निदेशक डस.ईश्वर वी.बसवारेड्डी ने योग दर्शन के प्रथम अध्याय के सूत्र संख्या 30 से 40 की सारगर्भित व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने योग के अन्तराय की चर्चा करते हुए इसे दूर करने के लिए महर्षि पतंजलि द्वारा निर्दिष्ट एक तत्व अभ्यास, प्राणायाम आदि पर प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय रोहतक के सेवानिवृत प्रोफेसर बलवीर आचार्य ने साधन पाद के कुछ सूत्रों पर चर्चा की तथा अष्टांग योग पर उदाहरण सहित विस्तार से अपनी बात रखी। तृतीय तकनीकी सत्र में पतंजलि विश्वविद्यालय की कुलानुशासिका एवं दर्शनशास्त्र विभाग की अध्यक्षा प्रो.साध्वी देवप्रिया ने सम्बोधित करते हुए कहा कि योग दर्शन के तृतीय अध्याय की चर्चा के क्रम में धारणा, ध्यान, समाधि एवं संयम जैसे गूढ़ विषयों पर सहजता से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अन्त में शब्दावली आयोग के अध्यक्ष द्वारा विद्वानों एवं प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया गया। सत्र संचालन में वि.वि. के संकायाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो.वी.के.कटियार, सह-संयोजक डा.रुद्र एवं डा.विपिन सहित विश्वविद्यालय के सभी अधिकारीगण, आचार्यगण एवं शोधछात्रों ने सहभागिता की।