एकात्ममानववाद के प्रणेता पंडित उपाध्याय का जीवन कठिन परिस्थितियों में गुजरा-डा.चैहान

हरिद्वार। विचार दिवस के रूप में मनायी गयी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 105वीं जयंती पर भाजपा जिला कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष डा.जयपाल सिंह चैहान ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन काफी कठिन परिस्थितियों में गुजरा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रतिभावान छात्र थे। उन्होंने सभी परीक्षाएं प्रथम श्रेणी में उत्र्तीण की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आने पर उन्होंने सांसरिक बन्धनों से मुक्त रहकर देश सेवा का संकल्प लिया। 1942 में उनका प्रचारक जीवन गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर, उ.प्र.) से प्रारम्भ हुआ। 1947 में वे उत्तर प्रदेश के सहप्रान्त प्रचारक बनाये गये। 1951 में डा.श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने नेहरू की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीतियों के विरोध में केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल छोड़ दिया। जिला महामंत्री विकास तिवारी ने कहा कि 1953 के कश्मीर सत्याग्रह में डा.मुखर्जी की रहस्यपूर्ण परिस्थितियों में मृत्यु के बाद जनसंघ की पूरी जिम्मेदारी पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर आ गयी। वे एक कुशल संगठक, वक्ता, लेखक, पत्रकार और चिन्तक थे। 11 फरवरी, 1968 को वे लखनऊ से पटना जा रहे थे। रास्ते में  किसी ने उनकी हत्या कर मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर लाश नीचे फेंक दी। इस प्रकार अत्यन्त रहस्यपूर्ण परिस्थिति में एक मनीषी का निधन हो गया। कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री विकास तिवारी ने किया। इस अवसर पर प्रदेश सह मीडिया प्रभारी सुनील सैनी, जिला उपाध्यक्ष देशराज रोड, अंकित आर्य, जिला कार्यालय प्रभारी लव शर्मा, जिला मंत्री आशु चैधरी, जिला सोशल मीडिया प्रभारी मोहित वर्मा, जिला कोषाध्यक्ष विजय चैहान, विनोद चैहान, युवा मोर्चा महामंत्री सचिन चैधरी, प्रीति गुप्ता, संदीप कुमार, अल्पसंख्यक मोर्चा जिला अध्यक्ष राव जमीर आदि पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।