पितृपक्ष में लावारिस अस्थियों को पूर्ण विधान के साथ किया विसर्जित

हरिद्वार। हिन्दी कश्मीरी संगम और धर्म यात्रा महासंघ के तत्तवाधान में कनखल के सती घाट पर लावारिस अस्थियों को मां गंगा में पूर्ण वैदिक विधि विधान से विसर्जित किया गया। इस मौके पर शारदा सर्वज्ञ पीठ के स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ ने कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान, आधुनिकतावाद, बाजारवाद के चलते सनातन धर्म लुप्त हो रहा है। भारतीय संस्कृति की परंपराओं को बचाने का समय आ गया है। जो सनातन धर्म की परंपरा का निर्वहन कर रहे है। ऐसे लोगों का कार्य वंदनीय और पूजनीय है। विवादां में न पड़ते हुए सनातन धर्म का बीज अंकुरित करने की आवश्यकता है। ताकि भविष्य में वृक्ष बनकर खड़े हो सके। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पूजा माई ने लावारिस आत्माओं को मोक्ष दिलाने से बड़ा कोई पूण्य कार्य नहीं है। इसीलिए वे दिल्ली से हरिद्वार आकर अस्थि विसर्जन के कार्य में सहयोग किया है। उन्होनें यात्रा संयोजक रानी डा. बीना बुंदकी को अपनी मां बताते हुए कहा कि उनके महान काय के लिए उन्हें अपनी शुभकामनाएं देती है। रानीपुर विधायक आदेश चैहान ने कहा भारत के विभिन्न राज्यों से लावारिस अस्थियों को लाकर मां गंगा में विसर्जित करने के लिए वें दोनों संगठनों का हार्दिक आभार व्यक्त करते है। कार्यक्रम संयोजक डा. बीना बुंदकी ने कहा कि जीवनकाल में सभी लोग साथ रहते है। किन्तु मरणोंपरांत मनुष्य के कर्म ही उनके साथ जाते है। वर्तमान में उन्हांने लावारिसों को अपना कंधा देकर मां गंगा की गोद में अर्पित किया है। उन्होने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। पंडित जितेन्द्र शास्त्री और पंडित नितिन माना ने पूर्ण विधि विधान से अस्थियों को मां गंगा में प्रवाहित कराया। कार्यक्रम का संचालन डा. रजनीकांत शुक्ला ने किया। इस मौके पर धर्मयात्रा महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष काशीनाथ, प्रांतीय महामंत्री अशोक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष रुपेन्द्र गुप्ता, उपाध्यक्ष ललिता मिश्रा, विश्व हिंदू परिषद की प्रांतीय उपाध्यक्ष संध्या कौशिक, जानकी प्रसाद, यशपाल, मंजू अग्रवाल, सुषमा मिश्रा, पं चन्द्र प्रकाश शुक्ला सहित अन्य लोग मौजूद रहे।