देवोत्थान एकादशी व तुलसी विवाह के मौके पर मंगल शोभायात्रा निकाली

 हरिद्वार। तुलसी विवाह एवं देवोत्थान एकादशी के मौके पर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिवार, शांतिकुंज, ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के अंतेवासी कार्यकर्त्ताओं ने मंगल शोभायात्रा निकाली। आचार्य ऋषि की पावन समाधि स्थल से तुलसी मैया का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजन कर शोभायात्रा प्रारंभ हुई। इसमें शंख, घंटा, बांसुरी, बैण्ड, सितार, मंजिरा आदि भारतीय वाद्ययंत्रों के वादन हो रहा था, जो आकर्षण का केंद्र बना दिखा। रैली की प्रथम पंक्ति में बच्चे थे, जो सिर पर कलश में तुलसी के पौधे लेकर चले रहे थे। बहिनों एवं भाइयों ने तुलसी कांवड़ अपने कंधों पर उठाये थे। वहीं तुलसी मैय्या की पालकी एवं तुलसी रथ को मनभावन रूप से सजाया गया था। शोभायात्रा जब शांतिकुंज गेट नंबर एक में पहुंची तो संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने आरती एवं पूजन किया। उन्होंने सबके उत्तम स्वास्थ्य एवं मानसिक सुदृढ़ता की प्रार्थना की। इस अवसर पर अपने संदेश में गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि देवोत्थान एकादशी को तुलसी एकादश भी कहा जाता है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार आज के ही दिन तुलसीजी का विवाह भगवान श्रीविष्णु के शालिग्राम रूप से कराया गया है। इसका सौभाग्य की प्राप्ति के रूप में उल्लेख मिलता है। देसंविवि के कुलपति शरद पारधी ने तुलसी मैया एवं देवोत्थान एकादशी की पौराणिक कथाओं का उल्लेख करते हुए अपने आंतरिक शक्ति के जागरण के लिए प्रेरित किया। प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि ज्योतिष गणना के अनुसार प्रबोधिनी एकादशी से भगवान विष्णु पुनः भूलोक आ रहे हैं और मांगलिक कार्यों का श्रीगणेश हो रहा है। इसलिए सभी अपने तन एवं मन की सुदृढ़ता के साथ आगे बढ़ते हुए इच्छित कार्यों को पूरा करने चाहिए। कार्यक्रम में व्यवस्थापक महेन्द्र शर्मा, शिवप्रसाद मिश्र, श्यामबिहारी दुबे, उदयकिशोर मिश्र, देसंविवि के कुलसचिव बलदाऊ देवांगन, ओंकार पाटीदार, राजकुमार वैष्णव, परमानंद द्विवेदी, मंगल सिंह, नरेन्द्र ठाकुर, सोमेश्वर ताण्डी, रामदास आदि शामिल रहे।