पवित्र गंगा जल कलश नेपाल के पशुपति नाथ के लिए हुई रवाना

 हरिद्वार। डा.मनोज कुमार-गंगोत्री से लाए गए मां गंगा के पवित्र जल कलश को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के चरण पादुका मंदिर से अपर कुम्भ मेला अधिकारी हरबीर सिंह, मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के परमाध्यक्ष श्रीमहंत रविन्द्रपुरी, एसएमजेएन कालेज के प्राचार्य डा.सुनील कुमार बत्रा, भाजपा जिला महामंत्री विकास तिवारी, अनिल शर्मा, बिन्दू गिरी, महंत डोंगर गिरी, श्रीमहंत रामरत्न गिरी, महंत नरेश गिरी, दिगम्बर राकेश गिरी, महंत दिनेश गिरी, महंत राधे गिरी, दिगम्बर अंबिका पुरी, दिगम्बर राज पुरी, श्रीमहंत केशव पुरी, महंत रविपुरी, पदम् नारायण गिरि, वैभव बत्रा, उज्ज्वल बत्रा, अमृता शर्मा, गुजरात आर्थिक निगम के चेयरमैन विमल उपाध्याय, हेमंत टुटेजा, प्रतीक सूरी, संदीप अग्रवाल, सुंदर राठौर, अर्जुन, मनोज मंत्री आदि ने जयकारों के साथ नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर के लिए रवाना किया। अपर कुम्भ मेला अधिकारी हरबीर सिंह ने कहा कि गंगोत्री से पशुपतिनाथ मंदिर में जलाभिषेक के लिए पवित्र जल कलश यात्रा भारत एवं नेपाल के मध्य सम्बन्धों में प्रगाढ़ता को प्रर्दशित करता है। भारत एवं नेपाल के मध्य रोटी एवं बेटी का सम्बन्ध प्राचीन काल से चला आ रहा है। यह परम्परा हमारी सांस्कृतिक विरासत को ओर अधिक मजबूत करेंगी। श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने बताया कि गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की प्रतिमा व छड़ी मुखीमठ में स्थापित होने के बाद पवित्र गंगा जल कलश को चरण पादुका मंदिर में रात्रि विश्राम व पूजा अर्चना के बाद नेपाल स्थित पशुपति नाथ मन्दिर के लिए रवाना किया गया। गंगोत्री से ले जाए गए जल से ही पूरे वर्ष पशुपतिनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया जाएगा। पवित्र गंगा जल कलश लेकर रावल शिवप्रकाश महाराज इन्दू इनक्लेव स्थित डा.सुनील कुमार बत्रा के आवास पर पहुंचे। वहां श्रृद्धालुओ ने पवित्र कलश पर पुष्प अर्पित किये। इसके बाद पवित्र कलश मुरादाबाद के लिए रवाना हो गया। रावल शिवप्रकाश महाराज ने बताया कि मां गंगा की पवित्र यात्रा का समापन 30 नवंबर को नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में अभिषेक के साथ होगा। डा.सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि यह हरिद्वार का सौभाग्य है कि पवित्र गंगा कलश के दर्शन करने का सभी हरिद्वार वासियों को सौभाग्य मिला है। मां गंगा जीवनदायिनी हैं तथा भारत की जीवनरेखा हैं। मां गंगा को स्वच्छ रखने का संकल्प हम सभी को लेना होगा तभी मां गंगा के दर्शन और उनकी पूजा करने की सार्थकता होगी।