कुंभ मेला परंपरागत स्वरूप में दिव्य व भव्य रूप से ही संपन्न होगा


 अखाड़ा परिषद एवं मुख्यमंत्री के बीच हुई बैठक में बनी सहमति,


हरिद्वार। कुंभ मेले आयोजन को लेकर राजधानी देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों व मुख्यमंत्री के बीच हुई बैठक में अखाड़ों की पहल पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरकी पैड़ी पर बह रही जल धारा को स्केप चैनल बताने वाले शासनादेश को रद्द करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत करते हुए सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूषों ने मुख्यमंत्री व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक का आभार जताया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने बताया कि बैठक में तय किया गया है कि अगले वर्ष होने वाला कुंभ मेला हमेशा की तरह अपने परंपरागत स्वरूप में दिव्य व भव्य रूप से ही संपन्न होगा। श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने बताया कि बैठक में तय हुआ है कि मेला क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर सभी पेशवाई मार्ग व शाही स्नान के लिए हरकी पैड़ी जाने वाले मार्ग का निर्माण कराने के साथ मेला क्षेत्र में संतों व श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। बैरागी कैंप को लेकर तय हुआ हैे कि हमेशा की तरह बैरागी अखाड़ों के शिविर बैरागी कैंप में ही लगेंगे। जल्द ही संतों की छावनियां स्थापित करने के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी। कुंभ निधि से सभी अखाड़ों के भव्य द्वार का निर्माण भी कराया जाएगा। कुंभ मेला का स्वरूप क्या होगा, इस पर 15 फरवरी के बाद निर्णय लिया जाएगा। यदि स्थिति सामान्य रहती है तो दिव्य व भव्य रूप से कुंभ संपन्न कराया जाएगा। यदि कोरोना को लेकर स्थिति बिगड़ती है तो कोविड नियमों के अनुसार ही सभी संत महापुरूष शाही स्नान करेंगे। बैठक में पहुंचे सभी संत महापुरूषों का मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व सभी संत महापुरूषों की भावनाओं के अनुरूप ही कुंभ मेला संपन्न कराया जाएगा। मेले के दौरान संतों व श्रद्धालुओं को उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार दिन रात काम कर रही है। बैठक में कुंभ मेला आईजी संजय गुंज्याल, मेला अधिकारी दीपक रावत, अपर मेला अधिकारी हरबीर सिंह सहित अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी, महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरी, मुखिया महंत भगतराम महाराज, श्रीमहंत राजेंद्रदास महाराज, श्रीमहंत धर्मदास महाराज, महंत रविन्द्रपुरी, महंत रामरतन गिरी, महंत दिनेश गिरी, महंत गौरीशंकर दास, महंत रामशरण दास, महंत रामजीदास, महंत दामोदर दास, महंत प्रेमदास, महंत महेश पुरी, महतं देवेद्र सिंह, महंत जसविन्दर सिंह, महंत देवानन्द, महंत शंकरानन्द, महंत केशवपुरी, महंत गिरीजानन्द सरस्वती, महंत सत्यानन्द, महंत सोमेश्वरानन्द आदि शामिल हुए।