श्रीमहंत नरेन्द्र गिरि का फर्जी संत का बयान महिलाओं का अपमान करने वाला-साध्वी त्रिकाल भवंता

 हरिद्वार। परी अखाड़े की प्रमुख साध्वी त्रिकाल भवंता ने अखाड़ा परिषद श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज के उन्हें फर्जी संत बताए जाने को नारी शक्ति का अपमान बताते हुए कहा कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरी का बयान महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। शासन प्रशासन को ऐसे लोगों के वक्तव्य से बचना चाहिए। उन्होने कहा कि वे संत है या नही यह तय करने वाला श्रीमहंत नरेन्द्र गिरि कौन है। दावा किया उनके अखाडे का पंजीकरण 2014 में ही हो गया था।  गुरूवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते साध्वी त्रिकाल भवंता ने कहा कि वे भारत की नागरिक हैं। संविधान प्रदत्त अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए उन्होंने स्वेच्छा से संत परंपरा को अपनाया है। कौन संत है, कौन संत नहीं है। यह तय करने का अधिकार किसी अन्य को नहीं है। उनका श्रीमहंत नरेंद्र गिरी से कोई संबंध नहीं है। ऐसे में उन्हें निष्कासित करने का भी कोई अधिकार उन्हें नहीं है। जो कुछ भी वे उनके बारे में कह रहे हैं। वह पूरी तरह गलत है। उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी के रिश्तेदार को ब्लैकमेल किए जाने श्रीमहंत नरेंद्र के आरोप पर उन्होंने कहा कि जिस रिश्तेदार की बात की जा रही है। उसने उनका विश्वासपात्र बनकर धोखाधड़ी से उनके खाते से लाखों रूपए निकाल लिए थे। इस संबंध में उन्होंने उसके खिलाफ मुकद्मा दर्ज कराया हुआ है। साध्वी त्रिकाल भवंता ने कहा कि उन्होंने मेला प्रशासन से अगले वर्ष होने वाले कुंभ मेले में परी अखाड़े को जमीन आवंटन किए जाने की मांग की है। ताकि अखाड़े की साध्वियां सुरक्षित रूप से अपनी साधना, पूजा पाठ व हरकी पैड़ी पर स्नान कर सकें। अब यह शासन व मेला प्रशासन को तय करना है कि अखाड़े की महिला साध्वियां कुंभ स्नान करेंगी या नहीं। उन्हें पूरा विश्वास है कि भाजपा शासन में महिलाओं के सम्मान की रक्षा करते हुए उनके अखाड़े को भी सुरक्षा, आवास, स्नान की सुविधा प्रदान की जाएगी। मेला प्रशासन को अनर्गल बयानबाजी करने वालों से बचना चाहिए।