अखाड़ा परिषद की मांग 2010 की तर्ज पर हो भव्य व दिव्य कुंभ

 सरकार सहयोग नही करती तो अखाड़े अपने संसाधनों से दिव्य-भव्य कुम्भ मनायेंगे-अध्यक्ष

हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने हरिद्वार कुंभ की तैयारी ना होने पर नाराजगी जताई है। परिषद की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सरकार से 2010 कुंभ की तरह इस बार भी हरिद्वार कुंभ की व्यवस्था करने को कहा गया है। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि अगर सरकार ने कुंभ करने की दिशा में अपने स्तर पर व्यवस्था नहीं की, तो आश्रम और अखाड़े अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नेतृत्व में यह व्यवस्था खुद कर लेंगे। कनखल स्थित श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन में कुंभ मेले को लेकर संपन्न हुई अखाड़ा परिषद की बैठक में संतों ने निर्णय लिया है कि यदि सरकार सहयोग नहीं करती है तो अखाड़े व संत समाज अपने संसाधनों से कुंभ को दिव्य व भव्य रूप से संपन्न कराएंगे। बैठक के दौरान मेला अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक पत्र भी प्रेषित किया गया। बैठक के बाद पत्रकारों को बैठक में लिए निर्णय की जानकारी देते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत नरेंद्र गिरि और राष्ट्रीय महामंत्री श्री महंत हरि गिरि ने स्पष्ट रूप से कहा कि हरिद्वार कुंभ अपनी पूरी शान और शौकत के साथ होगा। सरकार चाहे इसमें सहयोग करें या ना करें। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के नाम पर केवल धार्मिक आयोजनों पर ही कुदृष्टि डाली जा रही है जबकि राजनीतिक आयोजन धड़ल्ले से किए जा रहे हैं। चुनावी रैलियां हो रही हैं और सभाएं की जा रही हैं। नए साल के जश्न के लिए हर पहाड़ी पर्यटक स्थल भरा हुआ है। होटल तक सभी भरे हुए हैं। ऐसे आयोजनों पर रोक नहीं लग रही लेकिन धार्मिक आयोजनों पर पाबंदी लगा दी जा रही है। कहा रोजाना समाचार पत्रों में कोरोना संक्रमण के कम होने के समाचार आ रहे हैं, लेकिन कुंभ की तैयारियों को लेकर कोई तेजी नहीं दिखाई जा रही। अखाड़ों से जुड़े जगद्गुरू, धर्माचार्य, शंकराचार्य, महामण्डलेश्वर, रामानंदाचार्यो सहित संत महापुरूष कुंभ स्नान के लिए हरिद्वार आएंगे। जिस प्रकार कुंभ मेले के दौरान संतों के शिविर लगते रहे हैं। उसी प्रकार शिविर भी लगाए जाएंगे। कुंभ पूरी भव्यता के साथ संपन्न कराया जाएगा। सरकार व मेला प्रशासन शिविरों के लिए भूमि आवंटन व सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तत्काल काम शुरू करे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार व मेला प्रशासन सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराता है तो अखाड़े अपने संसाधनों के बल पर सभी व्यवस्थाएं करेंगे। वैष्णव अखाड़ों के संबंध में उन्होंने कहा कि बैरागी अखाड़ों के शिविर हमेशा की तरह बैरागी कैंप में ही लगेंगे। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा कि यदि राज्य सरकार संतों की मांग नहीं मानती है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर हरिद्वार कुंभ को दिव्य व भव्य रूप से संपन्न कराने की मांग की जाएगी। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरी महाराज ने कहा कि यदि सरकार अखाड़ों का सहयोग नहीं करती है तो 4 जनवरी के बाद अखाड़े अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर देंगे। अपने खर्च पर शिविरों के लिए भूमि का समतलीकरण, पेयजल, विद्युत, सीवर आदि तमाम व्यवस्थाएं करेंगे। जिन्हें मेला संपन्न होने के बाद जनहित में उपयोग के लिए छोड़ दिया जाएगा। बीस फरवरी के बाद यदि कोरोना अधिक बढ़ता है तो सरकार की गाईड लाईन का पालन किया जाएगा। यह भी कहा गया कि सरकार अगर कुंभ मेले के आयोजन के लिए कोई सीख लेना चाहती है तो वह एक जनवरी के बाद प्रयागराज माघ मेले की व्यवस्थाओं को देखने के लिए जाए। मेला अधिष्ठान के अधिकारियों को भेजें जिससे मेले की तैयारी के बारे में पता चल सकेगा। बैठक में श्रीमहंत रविन्द्रपुरी, महंत जसविन्दर सिंह, श्रीमहंत सत्यगिरी, श्रीमहंत साधनानंद, महंत दामोदरदास, महंत रामशरणदास, महंत गौरीशंकर दास, महंत रविन्द्रपुरी, महंत मंगलदास, महंत रामकुमार दास, महंत मनीष दास, श्रीमहंत नारायण गिरी, श्रीमहंत प्रेम गिरी आदि संत मौजूद रहे।