स्वच्छ एवं निर्मल बनाने के लिए सभी को कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए-डा.पण्ड्या

 हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज और यूसर्क (उत्तराखण्ड) से जुड़े विद्वानों की निर्मल गंगा अभियान के मद्देनजर एक ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें विद्वानों ने माना कि गंगा के जल को निर्मल बनाने के लिए सार्थक कदम के साथ सभी को पूर्ण सहयोग करने होंगे। अब तक जो कार्य हुए हैं, उसमें कई और सुधार की आवश्यकता है। संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि पतित पावनी गंगा भारत की जीवन रेखा समान है। गंगा का जल अमृत तुल्य है। इसे स्वच्छ एवं निर्मल बनाने के लिए हम सभी को कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए। उन्होंने अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा चलाये जा रहे निर्मल गंगा जन अभियान की जानकारी दी। कहा कि इस अभियान में गायत्री परिवार के कई लाख स्वयंसेवक जुटे हैं। उन्होंने कहा कि अब तक हुए कार्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तैयार की जानी चाहिए। प्रमुख सचिव (उच्च शिक्षा विभाग) आईएएस आनंद वर्धन ने गंगा को निर्मल बनाने के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने गंगा का स्वरूप, उसकी धारा, उसका भूगोल व उसकी धार्मिक भावना को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में समझाया। इससे पूर्व टीसीएम (तकनीकी, संवाद व प्रबंधन) संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. अभय सक्सेना ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर यूसर्क से सुरेश नौटियाल, नैनीताल से डा. आशुतोष भट्ट, डॉ. शिवनारायण प्रसाद, राधेश्याम सोनी, डॉ. अरूणेश पाराशर, डॉ. उमाकांत इंदौलिया आदि ने भी विचार रखे।


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