मकर संक्राति पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

 स्नान पर्व के मददे्नजर सुरक्षा के खास इंतजामात

हरिद्वार। कुम्भ 2021 के अघोषित पहले मकर संक्रांति स्नान पर्व के मौके पर कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्वालुओं ने हर की पैड़ी सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर गंगा में डुबकी लगाते हुए सुख-समृद्वि की कामना की। इस दौरान सुरक्षा के खास इंतजामात किये गये थे। गुरूवार को मकर संक्रान्ति के मौके पर सुबह तड़के चार बजे से ही बड़ी तादाद में लोग हर की पैड़ी सहित गंगाघाटों पर पहुंचने शुरू हो गए थे। सवेरे चार बजे शुरू हुआ गंगा स्नान का सिलसिला सांय तक जारी रहा। कड़ाके की ठंड के बावजूद भारी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए तड़के से ही हरकी पैड़ी समेत तमाम गंगा घाटो पर जुटने लगे थे। स्नान को संपन्न कराने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 7 जोन एवं 20 सेक्टरों में बांटकर सुरक्षा व यातायात प्रबंध किए गए थे। भगवान भाष्कर के दक्षिणायन से उत्तरायण जाने के दिन मकर संक्रान्ति को श्रद्धालुओं ने हर की पैड़ी पर गंगा स्नान करने के साथ-साथ अपने देवी-देवताओं को भी स्नान कराया। गंगा स्नान के बाद श्रद्वालुओं ने यथासंभव तिल और उड़द की दाल की खिचड़ी तथा गर्म कपड़े दान पूण्य किये। दूसरी ओर कई लोगों ने मांगलिक कार्य भी संपन्न कराए। मान्यता है कि सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश कर गए हैं और इसी के साथ आज से शुभ कार्य शुरू हो गए हैं। हर की पैड़ी पर मेला प्रशासन ने कुम्भ वर्ष के पहले स्नान पर्व को कुंभ की तर्ज पर रिहर्सल के तौर पर मानते हुए व्यवस्था की थी। हर की पैड़ी सहित अन्य गंगा घाटों पर चारों और बड़ी तादाद में पुलिस तैनात की गई थी। मकर संक्रान्ति के मौके पर देश के विभिन्न प्रांतों राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा सहित पड़ोसी नेपाल से भी बड़ी तादाद में लोग गंगा में स्नान करने आए। धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति पर गंगा में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर की पैड़ी पर कुंभ मेले की तर्ज पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी। मकर सक्रांति को उत्तरायणी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। मकर (संक्रान्ति) पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करते हैं। पौष मास में सूर्य के मकर राशि में आने पर तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। मकर संक्रांति स्नान को शाही स्नान की रिहर्सल रूप में लेते हुए कुम्भ मेला पुलिस ने सुरक्षा इंतजामों को पूरी तरह लागू करते हुए सरुक्षा प्रबंधों को परखा। जिलाधिकारी सी.रविशंकर, एसएसपी सेंथिल अवूदई कृष्णराज एस, मेला आईजी संजय गुंज्याल, मेला एसएसपी जनमेजय खण्डूरी समेत तमाम वरिष्ठ अधिकारी सुबह से हरकी पैड़ी पर मौजूद रहे।दूसरी ओर जिला अधिकारी सी.रविशंकर ने बताया कि बड़ी संख्या में लोग स्नान के लिए पहुंचे। स्नान को संपन्न कराने में कोरोना एक बड़ी चुनौती है। कोरोना दिशा निर्देशों का पालन कराया जा रहा है। स्नान के लिए आए लोगों को मास्क भी वितरित किए जा रहे हैं।