कुम्भ को लेकर भ्रम की स्थिति,सरकार स्नान को लेकर की स्पष्ट नीति घोषित करें-तन्मय वशिष्ठ

 

हरिद्वार। हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था श्री गंगा सभा ने सरकार से कुंभ को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। बुधवार को श्रीगंगा सभा कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि कुंभ को लेकर सरकार व अधिकारियों की और से जारी नित नए निर्देशों की वजह से कुंभ को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है। वशिष्ठ ने कहा कि कहा कि अब तक परंपरा रही है कि एक जनवरी को सरकार द्वारा कंुभ का नोटिकेशन जारी करने के बाद कुंभ शुरू हो जाता है। मकर संक्रांति को कुंभ से जुड़ा पहला स्नान पर्व होता है। लेकिन इस वर्ष हो रहे कुंभ को लेकर सरकार की ओर से अभी तक नोटिफिकेशन ही जारी नहीं किया गया है। बल्कि कुंभ की अवधि को सीमित किया जा रहा है। ऐसे में जब सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर कुंभ शुरू होने की घोषणा ही नहीं की गयी है तो केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जारी एसओपी को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। तकनीकी रूप से नोटिफिकेशन जारी किए बिना एसओपी लागू नहीं होती। भारी भरकम एसओपी व निर्देशों को लेकर आमजन में कुंभ को लेकर बनी भ्रम व संशय की स्थिति को दूर किया जाना चाहिए। कोविड नेगेटिव रिपोर्ट लाने की अनिवार्यता जैसे सख्त नियमों के चलते श्रद्धालुओं में भय का माहौल है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि एसओपी में जारी दिशा निर्देश केवल कुंभ स्नानों पर लागू होंगे या सामान्य दिनों में भी लागू रहेंगे। यदि सामान्य दिनों में भी कड़े दिशा निर्देश लागू किए जाते हैं तो इसका विरोध किया जाएगा। कड़े निर्देशों के चलते बेहद कम संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार आएंगे। तन्मय वशिष्ठ ने अस्थि विसर्जन के लिए आने वाले लोगों को छूट दिए जाने की मांग करते हुए कहा कि लाॅकडाउन के दौरान भी अस्थि विसर्जन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं पर कड़े प्रतिबंध नहीं लगाए थे। अस्थि विजर्सन एक बेहद जरूरी कार्य है। जिसे प्रतिबंधों से मुक्त रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या व बसंत पंचमी स्नान पर किसी तरह के प्रतिबंध लागू नहीं है। श्रद्धालु अधिक से अधिक संख्या में गंगा स्नान के लिए आएं। गंगा सभा अध्यक्ष प्रदीप झा ने कहा कि कुंभ आयोजन को लेकर स्पष्टता नहीं होने की वजह से गंगा सभा ही नहीं बल्कि पूरा हरिद्वार चिंचित है। कोरोना की मार झेल रहे हरिद्वार के लोगों को कुंभ से बड़ी आस थी। लेकिन जिस प्रकार कड़े प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं। उससे कुंभ स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में निश्चित तौर पर कमी आएगी। जिससे मंदी से उबरने की आस कर रहे व्यापारियों, होटल व ट्रैवल व्यवसायियों की उम्मीदों को झटका लगना तय है। केवल धार्मिक कार्यक्रमों के लिए ही कड़े दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं। सरकार को जमीनी हकीकत को समझते हुए कुंभ को भव्य व दिव्य रूप से आयोजित कराना चाहिए। जिससे मंदी की मार झेल रहे हरिद्वार के व्यापार को गति मिल सके। इस दौरान पुरोहित सिद्धार्थ चक्रपाणी ने भी गंगा सभा अध्यक्ष व महामंत्री की बातों का समर्थन करते हुए सरकार से नियमों में ढील देने की मांग की।