निरंजनी अखाड़े में स्थापित की गयी बावन फीट ऊंची धर्मध्वजा

 

हरिद्वार। निरंजनी अखाड़े में धर्मध्वजा की स्थापना के साथ विधिवत रूप से कुंभ मेले का आगाज हो गया। शनिवार को अखाड़े के संतों ने चरण पादुका मंदिर परिसर में वैदिक विधि विधान व मंत्रोच्चारण के साथ बावन फीट ऊंजी धर्मध्वजा की स्थापना की। निरंजनी अखाड़े की परंपरा के अनुसार धर्मध्वजा स्थापना के समय अखाड़े के श्रीमहंत मौजूद नहीं रहे। आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज व अन्य संतों ने धर्मध्वजा की स्थापना की। इस दौरान निरंजनी अखाड़े के संतों के साथ कुंभ मेला अधिकारी दीपक रावत, अपर मेला अधिकारी हरबीर सिंह सहित मेला प्रशासन के अधिकारी व कुंभ मेला आईजी संजय गुंज्याल भी मौजूद रहे। दशनाम सन्यास परम्परा की बावन मढ़ीयों की प्रतीक धर्मध्वजा में बावन बंध लगाए गए हैं। कुंभ मेले के दौरान अखाड़े के सभी क्रियाकलाप धर्मध्वजा के नीचे ही संपन्न होंगे। धर्मध्वजा के नीचे ही अखाड़े के आचार्य महामण्डलेश्वर नागा सन्यासियों को दीक्षा देंगे। इस अवसर पर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि अखाड़ों में धर्मध्वजा की स्थाना कुंभ मेले का शुभारंभ होता है। सात सन्यासी अखाड़ों में सबसे पहले निरंजनी अखाड़े में धर्मध्वजा स्थापित की गयी है। उन्होंने बताया कि दशनाम सन्यास परम्परा का पालन करते हुए विशाल धर्मध्वजा में सबसे ऊपर अखाड़े का ध्वज लगाया गया है। कुंभ मेले के दौरान सभी कार्य धर्मध्वजा के नीचे ही संपन्न होंगे। धर्मध्वजा के नीचे ही नागा संयासियों को दीक्षा व महाण्डलेश्वरों को पद पर आसीन किया जाएगा। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा कि धर्मध्वजा की स्थापना के साथ ही निंरजनी अखाड़े में कुंभ मेले का आगाज हो गया है। तीन मार्च को अखाड़े के रमता पंच व नागा सन्यासी पेशवाई के रूप में अखाड़े में प्रवेश करेंगे। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि धर्मध्वजा की स्थापना के साथ ही कुंभ मेला प्रारंभ हो चुका है। एसएमजेएन कालेज में रमता पंचों की जमातें ठहरी हुई हैं। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला दिव्य व भव्य रूप से संपन्न होगा। इस अवसर पर श्रीमहंत रामरतन गिरी, श्रीमहंत दिनेश गिरी, श्रीमहंत ओमकार गिरी, महंत नरेश गिरी, महंत राधे गिरी, महंत लखन गिरी, दिगंबर गंगा गिरी, दिगंबर बलवीर पुरी, स्वामी रघुवन, स्वामी रविवन, महंत जसविन्दर सिंह, महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री, महंत शंकरानंद सरस्वती, श्रीमहंत गिरजानंद सरस्वती, श्रीमहंत साधनानंद, महंत ललितानंद गिरी, महंत दामोदर दास सहित बड़ी संख्या में विभिन्न अखाड़ों के संत महापुरूष मौजूद रहे।