किसान आंदोलन संविधान और जनतंत्र को बचाने की बड़ी लडाई-प्रदीप टम्टा

 

हरिद्वार। गाॅधी स्टडी सर्कल की ओर से गाॅधी और किसान विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि वर्तमान किसान आंदोलन केवल देश की खेती-किसानी बचाने मात्र का आंदोलन नहीं है बल्कि पूंजी और साम्प्रदायिकता के गठजोड़ से देश के संविधान और जनतंत्र को बचाने की बड़ी लड़ाई है। रविवार को प्रेस क्लब में इस गोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में प्रदीप टम्टा ने आजादी के आंदोलन में किसान आंदोलन की श्रृंखला और गांधी के चिंतन की धारा को बताते हुए कहा कि गांधी की अगुआई में किसान आंदोलन से आरंभ संघर्ष आजादी के आंदोलन के साथ ही सामाजिक सद्भाव और परिवर्तन के आधार बन गये। उन्हीं परिवर्तनों की धरोहर भारतीय संविधान और जनतंत्र को बचाने की यह लड़ाई है। टम्टा ने कहा कि सरकार खेती को बाजार के हवाले कर भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के मूल्यों और परंपराओं पर हमला कर रही है। पूर्व विधायक अंबरीष कुमार ने बापू के चंपारण से पहले वाराणसी की सभा की याद दिला कर बापू के भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को वैचारिक आधार देने को विश्व में विशिष्ट पहचान बताया। श्रमिक नेता मुरली मनोहर ने किसान आंदोलन को ऐतिहासिक बताते हुए इस आंदोलन के साथ खड़े होने पर जोर दिया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुभाष घई की अध्यक्षता और राजेश शिवपुरी के संचालन में गोष्ठी संपन्न हुई। गोष्ठी में महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. सन्तोष चैहान, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, कांग्रेस नेता मकबूल कुरैशी, नईम कुरैशी, पुरुषोत्तम शर्मा, आकाश भाटी, नितिन तेश्वर, अनिल गिरी आदि शामिल रहे।