पदोन्नति में आरक्षण सम्बन्धी इंदुकुमार पाण्डे की रिर्पोट सार्वजनिक करने की मांग

 हरिद्वार। अनुसूचित जाति जनजाति शिक्षक एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मेघराज सिंह ने कहा कि एसोसिएशन कई वर्षों से आरक्षित वर्ग के मुद्दों पर लगातार जिला-प्रशासन और सरकार को ज्ञापन भेज रही है। लेकिन उसमें कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। शुक्रवार को एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड स्थापना से अब तक हर विभाग में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के कार्मिकों के प्रतिनिधित्व की भी समीक्षा नहीं की है। पदोन्नति में आरक्षण संबंधी आंकड़े इंदु कुमार पांडे एवं इरसाद आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए इस वर्ग के प्रतिनिधित्व की भी समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि देहरादून में एक राज्य स्तर का आंबेडकर भवन बनाने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा की गई थी। उसमे भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। आगामी समय में कैबिनेट की होने वाली बैठक में इन विषयों को शामिल किया जाए। जिलाध्यक्ष ने कहा कि नई पेंशन योजना की कमियों को देखते हुए समीक्षा की जाए व पुरानी पेंशन बहाली हेतु आगामी बजट सत्र में संकल्प पारित करते हुए भारत सरकार को भेजा जाए। जिला महामंत्री जीतपाल सिंह ने कहा कि वर्ष 2001 से 2007 तक विद्यालयी शिक्षा विभाग में एलटी से तदर्थ प्रवक्ता बनाए गए सभी एससी वर्ग के शिक्षकों को भी सामान्य संवर्ग की तरह ही मौलिक नियुक्ति प्रदान की जाए। आज तक इस वर्ग के प्रवक्ताओं को सामान्य के साथ मौलिक नियुक्ति क्यों नहीं दी गई, इसकी भी समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी में परीक्षा के आधार पर उत्तीर्ण एससी एसटी वर्ग के कार्मिकों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ क्यों नहीं दिया गया, इसकी भी समीक्षा की जाए। क्योंकि 5 सितंबर 2012 से पूर्व प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिल रहा था। ज्ञापन में बताया गया कि पूर्व में संज्ञान में लाए गए रिक्त 20 हजार से अधिक बैकलॉग के पद कहां गए, इसकी भी समीक्षा की जानी अति आवश्यक है। एसोसिएशन का मानना है कि उत्तराखंड राज्य में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के साथ लगातार अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की शिकायतें होती रहती हैं किंतु प्रदेश सरकार द्वारा कोई संज्ञान नहीं दिया जाता है।