धूमधाम से मनाई गई गुर्जर सम्राट भोज परमार की जयंती

 

हरिद्वार। अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के तत्वावधान में जगजीतपुर स्थित कार्यालय पर गुर्जर सम्राट भोज परमार की जयंती बड़े ही धूमधाम से मनायी गयी। अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष लाखन गुर्जर व राष्ट्रीय महामंत्री व उत्तराखंड प्रभारी नीरज चैधरी ने कहा कि गुर्जर जाति के चार प्रसिद्ध राज कुल प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चैहान थे। गुर्जर प्रतिहार सम्राटों के अधीन सामन्तों में परमार गोत्र के थे। आबू, चन्द्रावती, अवन्ती, उज्जैन, धारानगरी (मालवा) आदि कई प्रमुख राज्यों की स्थापना परमार गुर्जरों ने की थी। आबू के परमार सामन्त और मालवा के परमार सामन्त गुर्जर प्रतिहार सम्राटों के बहुत वफादार रहे थे। गुर्जर परमार शासकों में महाराजा गुर्जर भोज परमार ने चारों तरफ दिग्विजय हासिल की। गुर्जर भोज परमार मालवा पर शासन पैंतालीस वर्ष रहा। उनकी राजधानी धारा नगरी थी और जनता उन्हे भोज महाराज के नाम से जानती थी। उनके राज दरबार में कवियों, विद्धानों तथा साहित्यकारों का बहुत आदर होता था और भारत भर के विद्वान आदर पूर्वक भोज महाराज से आर्थिक सहायता प्राप्त करते थे। इन विद्वानों ने अपनी प्रसिद्ध ग्रन्थ रचनाओं में सम्राट भोज परमार की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। जिससे भोज परमार का नाम अमर हो गया है। सम्राट भोज परमार स्वयं भी विद्वान एवं विद्याव्यसनी तथा महान कवि थे। उसने औषधि शास्त्र, ज्योतिष, कृषि, धर्म, वास्तु कला, श्रृंगार कला, कला, शब्दकोष, राजनीति, रणनीति, साहित्य, संगीत आदि विविध विषयों पर अनेक प्रामाणिक ग्रंथ लिखे। उसकी प्रसिद्ध रचनाएं आयुर्वेद सर्वस्व राज मृगांक व्यवहार समुच्चय, ’शब्दानुशासन’, समरागण, सूत्रधार, सरस्वती कंठाभरण, नाभ मलिक, मुक्ति कल्पतरू आदि हैं। इनके अतिरिक्त भोज ने रामायण चप्पू व श्रृंगार प्रकाश नामक काव्य ग्रंथ लिखें। प्रसिद्ध पुरातत्व वेता हरिभाऊ वाकण कर ने गुर्जर राजा भोज परमार के रचनात्मक सार्वजनिक कार्यो का एक नमूना इस प्रकार लिखा है विश्व का सबसे बड़ा बांध राजा भोज ने बनवाया था। जिसमें 340 पहाड़ी नदियों का पानी जमा होता था। गुर्जर भोज परमार ने बुद्धिजीवी वर्ग को बहुत मान सम्मान तथा सहायता दी तभी तो उसका नाम अन्य राजा महाराजाओं की अपेक्षा कहीं अधिक प्रसिद्ध हुआ, शंकर, बुद्धि सागर, तिलक मंजरी का लेखक धनपाल कवि, मन्त्र भाष्य का लेखक यूवत, मिताक्षरा का लेखक जनानेश्वर, कालीदास नालोदय व चप्पू रामायण के लेखक भोज के समकालीन व उसके दरबारी कहें जाते हैं। इस अवसर पर सन्नी, कृष्ण गुर्जर, सेठपाल गुर्जर, अंकुर बटार, देवेन्द्र गुर्जर आदि उपस्थित रहे।