आयुर्वेद और योग भारत की मूल चिकित्सा पद्धति है-डाॅ.धन सिंह रावत

हरिद्वार। कमल मिश्रा-उत्तराखण्ड संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित द्वि-दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय योग शोध सम्मेलन का उद्घाटन प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ0 धन सिंह रावत ने किया। आॅनलाइन माध्यम से सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री डा.रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय योग के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहा है, इसके लिए विश्वविद्यालय के कुलपति एवं योग विज्ञान विभाग की पूरी टीम बधाई की पात्र है। केन्द्र और उत्तराखण्ड सरकार योग को बढ़ावा देने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है। योग के विद्वानों एवं शोध छात्रों के लिए नए-नए प्रयोग करते रहने से उत्साह एवं नवीन मार्ग उपलब्ध होंगे, जिसका लाभ देश और दुनिया को मिलगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में पूरी दुनिया की नजर भारत पर है। आयुर्वेद और योग भारत की मूल चिकित्सा पद्धति है। इसलिए योग से जुड़े लोगों का दायित्व और भी बढ़ जाता है कि वे आधुनिक बीमारियों का योग के द्वारा वैज्ञानिक तथा यौगिक चिकित्सा के द्वारा अनुसंधान कर निवारण करें। मुख्य अतिथि के उद्बोधन से पूर्व अतिथियों ने मंत्रों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। डाॅ0 कामाख्या कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इण्डियन एसोसिएशन आॅफ योग के छात्रों एवं शिक्षकों को एक मंच प्रदान करने का कार्य कर रहा है और योग को वैज्ञानिक विकास की ओर ले जाने का कार्य कर रहा है। प्रो0 जी0डी0शर्मा ने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं है अपितु योग आध्यात्मिक चेतना का एक श्रेष्ठ मार्ग है। कुलपति प्रो0 देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि योग में अनुशासन होना जरूरी है तथा अष्टांग योग स्थूल एवं सूक्ष्म शरीर दोनों को संयुक्त रूप में कार्य करने की क्षमता प्रदान करता है। कार्यक्रम में आये हुए अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डाॅ0 लक्ष्मी नारायण जोशी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 विनय सेठी ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी, प्रो0 ईश्वर भारद्वाज, डाॅ0 सुधांशु वर्मा, डाॅ0 अजय परमार, डाॅ0 उमेश शुक्ल, डाॅ0 शिवोह्म, अनुपन कोठारी, अनूप बहुखंडी, शिवचरण नौटियाल, अंजना उनियाल, मोहित लोहान, आशीष सेमवाल, रविश कुमार, ललित शर्मा, रश्मि शर्मा, श्वेता, दीक्षा चैहान, हिमांशु लोसाली आदि उपस्थित रहें।