श्रम कानूनों में श्रमिक विरोधी परिवर्तनों का पुरजोर विरोध करेगी -दीप गुप्ता

 यूनियन में शामिल हुए कई नए सदस्य

हरिद्वार। भेल श्रमिक संघर्ष यूनियन हीप का तृतीय स्थापना दिवस बी.एच.ई.एल.एम्पलाईज कम्यूनिटी सेंटर सोसाइटी सेक्टर-1 में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान यूनियन के सैकड़ो सदस्य मौजूद रह। इस दौरान कई भेल श्रमिकों ने यूनियन की सद्स्यता ली। सदस्यता लेने वालों में मनीष धीमान, ओमकृष्ण निगम, नरेश कुमार, आशीष कुमार गुप्ता, नवीन कुमार प्रमुख रहे। यूनियन पदाधिकारियों ने सभी नए सदस्यों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए यूनियन महामंत्री प्रशान्त दीप गुप्ता ने यूनियन की स्थापना के तीन वर्ष पूरे होने की सभी को बधाई दी एवं के सहयोग के लिये आभार व्यक्त करते हुए कहा कि युवा कर्मचारियों की यूनियन गठन के बाद से ही श्रमिक हितों के लिये निरंतर संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि यूनियन भारत सरकार द्वारा जो सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेशीकरण की केंद्र सरकार की घोषणा एवं श्रम कानूनों में श्रमिक विरोधी परिवर्तनों का पुरजोर विरोध करेगी। हाल ही में देश के प्रधानमंत्री द्वारा कहा गया कि सरकार का काम रोजगार में बने रहना नहीं है। जिसके बाद नीति आयोग ने सार्वजनिक निजीकरण के कार्य में तेजी लाते हुए घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों के साथ साथ  मुनाफे वाले सार्वजनिक उपक्रमों का भी निजीकरण किए जाने हेतु सूची बनानी शुरू कर दी है। जिससे बीएचईएल के निजीकरण किये जाने की सम्भावना बढ़ गई है। भेल श्रमिक संघर्ष यूनियन सरकार की इस कार्यवाही का पुरजोर विरोध करती है। मंत्री रवि दुबे ने कहा कि भेल की वर्तमान मान्यता प्राप्त यूनियनें श्रमिकों की ज्वलंत माँगों जिनमें विगत 11 माह से की जा रही पकर्स कटोती को बंद कराने व 31 फासदी वृद्धि के साथ एरियर सहित भुगतान कराने, श्रमिकों को पीपीपी, एसआईपी, बोनस का भुगतान, 1 करोड़ रू. टर्म एंश्योरेंस स्कीम, पूर्व की भांति ईएल नकदी करण, लैपटॉप सुविधा, मृतक आश्रित को योगयतानुसार नौकरी, इंसेटिव भुगतान, पाँचवे फेस का समाधान कराकर श्रमिकों को प्लाट या मल्टीस्टोरी बिल्डिंग दिलवाने, 2003 बैच पे-एनामली का समाधान, संविदा श्रमिकों को 8 माह रोजगार दिलाने जैसी अति महत्वपूर्ण मांगों का समाधान कराने में विफल रही है। इसलिए युवा श्रमिकों का इनसे मोह भंग हो चुका है। जिसका परिणाम आगामी यूनियन चुनावों में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा। यूनियन के अध्यक्ष जसविंदर सिंह ने कहा कि चुनौतियां बड़ी हैं। बीएचईएल को निजीकरण से बचाने, रोजगार बचाने, श्रमिक विरोधी नये कानूनों को रद्द करवाने, ट्रेड यूनियन अधिकारों को बचाने के लिये सभी को एकजुट होकर संघर्ष के लिये तैयार रहना होगा। यदि हम अब भी नही जागे तो हमें बंधुआ मजदूर बनना पड़ेगा। कार्यक्रम में अमरजीत जाँगड़ा, सुमित कुमार, दीपक कुमार, रवि दुबे, नितिन सिंघल, विवेक सक्सेना, अरविंद अधिकारी, राजेश गर्ग, लव कुमार गौतम, गुलजार अहमद, शिव बक्शी, कमल, मनोज कुमार आदि सहित बड़ी संख्या में यूनियन के सदस्य व पदाधिकारी मौजूद रहे।