तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री बनने पर संत समाज ने बधाई

 हरिद्वार। तीरथ सिंह रावत को उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने पर संत समाज ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की है कि नए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कुंभ मेला दिव्य व भव्य रूप से संपन्न होगा। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज व निरंजनी अखाड़े के कुंभ मेला प्रभारी श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने मुख्यमंत्री बनने पर तीरथ सिंह रावत को बधाई देते हुए कहा कि संत महापुरूषों के आशीर्वाद से तीरथ सिंह रावत उत्तराखण्ड को प्रगति के पथ पर अग्रसर करेंगे तथा कुंभ मेले में अखाड़ों व संत समाज के सामने आ रही परेशानियों को दूर कर बाधा रहित कुंभ संपन्न कराएंगे। ऐसी संत समाज उनसे आशा करता है। अटल पीठाधीश्वर आचार्य म.म.स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज ने नवनियुक्त मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से मांग करते हुए कहा कि कुंभ मेला भारतीय संस्कृति व सनातन परंपराओं का केंद्र बिन्दु है। केंद्र एवं राज्य सरकार को कुंभ मेले को सकुशल संपन्न कराने के लिए संपूर्ण व्यवस्थाएं लागू करानी चाहिए। बाहर से आने वाले यात्री श्रद्धालुओं पर नियम ना थोपें जाएं। कोरोना संक्रमण को लेकर डर फैलाने के बजाए आम जनमानस को जागरूक किया जाना चाहिए। म.म.स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने नवनियुक्त मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कुंभ मेला दिव्य व भव्य रूप से सकुशल संपन्न हो। संत समाज उनसे आशा करता है। उन्होंने कहा कि कोरोना को लेकर जारी एसओपी के माध्यम से कुंभ पर जो प्रतिबंध लगाए गए हैं, उन्हें दूर किया जाए। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत एसओपी को सरल बनाएं। जिससे अधिक से अधिक श्रद्धालु 12 वर्ष में एक बार होने वाले कुंभ स्नान का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि मुगलकाल व अंग्रेजों के शासन में भी पूजा पाठ पर किसी प्रकार को प्रतिबंध नहीं लगाया गया था। लेकिन पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने जिस प्रकार कुंभ में श्रद्धालुओं के आने व पूजा पाठ, कथा, कीर्तन, भण्डारों आदि पर रोक लगायी। उससे पूरा संत समाज व्यथित था। संतों की व्यथा के परिणाम स्वरूप ही मुख्यमंत्री को कुंभ होने से पूर्व ही गद्दी छोड़नी पड़ी। इसलिए नवनियुक्त मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को संतों की भावना का सम्मान करते हुए बिना किसी प्रकार की बाधाएं लगाए कुंभ को संपन्न कराना चाहिए। श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज, श्रीमहंत धर्मदास महाराज व श्रीमहंत कृष्णदास नगरिया ने कहा कि कुंभ मेले की व्यवस्थाओं में बैरागी संतों की उपेक्षा व धर्म पर कुठाराघात करने के फलस्वरूप त्रिवेंद्र रावत को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि धर्म के प्रति आस्था रखनी चाहिए। कुंभ मेले में सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन पूर्व से ही होते चले आ रहे हैं। कथा, पूजा, पाठ, सत्संग, प्रवचन आदि पर रोक ना लगायी जाए। नए मुख्यमंत्री को हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए कुंभ मेले को संपन्न कराना चाहिए। म.म.स्वामी प्रबोधानंद गिरी महाराज ने कहा कि हिंदु संस्कृति से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करना गलत है। परंपरांओं का निर्वहन संत महापुरूष आदि अनादि काल से करते चले आ रहे हैं। सरकार को कुंभ की व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की अड़चन पैदा नहीं करनी चाहिए। महंत रामदास, महंत देवेंद्र तोमर महाराज, स्वामी निरंजन स्वामी, स्वामी कपिल मुनि, महंत निर्मलदास, महंत जयेंद्र मुनि आदि संतों ने भी मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। 


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