महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान

 

हरिद्वार। महाशिवरात्रि पर्व परे लाखों श्रद्वालुओं ने हर की पैड़ी सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर सुख समृद्वि की कामना की। इस दौरान लोगों ने शिवालयों में जलाभिषेक कर शिव अनुष्ठान किए। जिला प्रशासन की ओर ेसे कोविड19 को लेकर तय किये गये निमयों के बावजूद गंगा स्नान के लिए एक दिन पूर्व ही लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच गए थे। तड़के चार बजे शुरू हुआ स्नान का सिलसिला दिन भर चलता रहा। हालांकि अखाड़ों के संतों के स्नान के लिए सवेरे सात बजे हरकी पैड़ी को खाली करा लिया गया था। लेकिन इसके पूर्व लाखों लोगों ने हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान किया। महाशिवरात्रि पर धर्मनगरी में चारों ओर सड़कों पर श्रद्धालुओं का सैलाब नजर आया। रात से ही हर की पैड़ी पर तीर्थ यात्रियों की भीड़ लगी थी और भारी तादाद में तीर्थयात्रियों ने गंगा में डुबकी लगाई और भगवान शंकर का जलाभिषेक किया। इस अवसर पर लोगों ने दान पुण्य किया महाशिवरात्रि के दिन शिव जी का पार्वती से विवाह हुआ था। तड़के ही हर की पैड़ी पर ब्रह्म मुहूर्त में लोगों ने गंगा में डुबकी लगानी शुरू कर दी थी। सबसे पहले हर की पैड़ी पर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा आह्वान अखाड़ा अग्नि अखाड़ा स्नान ने स्नान किया। सम्पूर्ण कुम्भ मेला क्षेत्र में 10 बजे तक कि स्नानार्थियों की संख्या 24 लाख 20 हजार के पार पहुंच गई थी। हरकी पैड़ी पर आने वाले दोपहिया वाहनों को भी बुधवार को बंद कर दिया गया। स्थानीय लोगों को भी वाहन ले जाने नहीं दिए गए। भीड़ अधिक हो गई थी। एक ओर भीमगोड़ा तो दूसरी ओर कोतवाली नगर के पास बने बैरियर से वाहनों को रोका गया। आवश्यक कार्य के लिए जा रहे लोगों को ही वाहन ले जाने की अनुमति दी गई थी। हरिद्वार पहुंची तमाम राज्यों की बसों के अलावा ट्रेनों से भी लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी पर स्नान कर सूर्य को अध्र्य दिया और परिवारों के लिए मंगलकामना की। स्नान के उपरांत श्रद्धालुआकें ने दान पुण्य भी किया। शिवरात्रि स्नान के लिए आए श्रद्धालुओं के अलावा गंगा जल लेने आए लाखों कांवड़ियों ने भी गंगा स्नान किया। हरिद्वार के सभी होटल, धर्मशाला, लाॅज आदि यात्रियों से फुल रहे। यात्रीयों की भीड़ को देखते हुए बस स्टैण्ड को भी ऋषिकुल मैदान पर शिफ्ट कर दिया गया था। ऋषिकुल से आगे किसी भी वाहन को नहीं जाने दिया गया। जिससे यात्रीयों को परेशानी उठाते हुए अपना सामान उठाकर पैदल ही अपने गंतव्यों की ओर जाना पड़ा। मार्ग पर जगह-जगह बैरिकेड लगाकर निर्धारित मार्गो से ही यात्रियों को स्नान के लिए घाटों पर भेजा गया।