शिक्षा,स्वास्थ्य के साथ व्यक्ति का सम्रग विकास और आत्मनिर्भरता के लिए करेगे कार्य-गिरि

 

हरिद्वार। भौतिक सुखो को त्याग कर सन्यास के जरिये समाज और राष्ट्र के उत्थान में हर संभव सकारात्मक बदलाव लाने के पवित्र ध्येय को मानते हुए गृहस्थ से संत बने हिमालयन योगी महामण्डलेश्वर स्वामी वीरेन्द्रानंद गिरि महाराज सनातन धर्म के साथ साथ शिक्षा की अलख को और ज्यादा जगाने का कार्य करने जा रहे है। उन्होने कहा कि भारतीय परिवेश के लिहाज से शिक्षा पद्वति में बदलाव लाकर गाॅवों सुदूर क्षेत्रांे में रहने वाले युवाओं को भी शिक्षा के जरिये रोजगारोन्मुखी बनाना उनका प्रयास होगा। शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद से दीक्षित,जूना अखाड़ा के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि से शिष्यत्व प्राप्त करके जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज से मंत्र लेकर महामण्डलेश्वर बने स्वामी वीरेन्द्रानंद स्थानीयता को बढ़ावा देने के प्रबल पक्षधर है। महामण्डलेश्वर बने स्वामी वीरेन्द्रानंद गिरि महाराज ने बताया कि कुंभ में तीर्थनगरी हरिद्वार को एक नई सौगात मिलने जा रही है, जो सरकार या किसी अधिकारी द्वारा नहीं अपितु एक संत के द्वारा प्रदान की जाएगी। जिसकी इस पहल से यहाँ के स्थानीय युवा लाभान्वित होंगे और आने वाली नई पीढ़ी को नई दिशा मिलेगी। महामंडलेश्वर विरेंद्रानंद गिरी ने आज पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी द्वारा दीक्षा दिए जाने के दौरान उन्हें यह प्रतिज्ञा दिलाई गई कि वे समाज के शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए कार्य करेंगे। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि वे पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते चले आ रहे हैं, क्योंकि वह एक शिक्षक हैं इसलिए उन्होंने एशियन एकेडमी नाम से संस्था बनाई है जिसके माध्यम से कई स्कूल भी चला रखे हैं। इन स्कूलों में पिछले 07 सालों के दौरान 55 गांव से एमबीबीएस, आईआईटी एनडीए और स्पोर्ट्स के क्षेत्र में कई छात्र देश की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महाकुंभ 2021 के दौरान उन्हें हरिद्वार में आने का अवसर प्राप्त हुआ और अब वें जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर पद पर आसीन हैं, उनके प्रयास रहेंगे कि वें हरिद्वार को भी एक उच्च शिक्षण संस्थान प्रदान करें। जिसके लिए वें जल्द ही अप्रैल माह से हरिद्वार में एक स्कूल खोलने जा रहे हैं। जिसमें विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान की जाएगी। कोरोना काल में मानव सेवा को सर्वोपरि मानते हुए हजारों प्रवासियों सहित स्थानीय लोगों को भोजन और आश्रय प्रदान करने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले स्वामी वीरेन्द्रानंद हिमालयी राज्य में भौगोलिक परिस्थितियों को अनुकूल बनाने का कार्य भी अपने संस्था के माध्यम से कर रहे है। उन्होने एक दिन में डेढ़ लाख से अधिक पौधारोपण कर राज्य के लिए एक नई इबारत कायम की ।