महंत रामदास बने अयोध्या पीठ के जगद्गुरू रामानंदाचार्य

 अखाड़े की परंपराओं को समृद्ध करेंगे महंत रामदास-श्रीमहंत धर्मदास

हरिद्वार। तीनों वैष्णव अनी अखाड़ा चर्तु संप्रदाय 52 द्वारा एवं समस्त खालसों द्वारा महंत रामदास महाराज को अयोध्या पीठ का जगद्गुरु रामानंदाचार्य पद पर पट्टा अभिषेक किया गया। इस दौरान हैलीकाॅप्टर से पुष्प वर्षा भी की गयी। बैरागी कैंप स्थित अखिल भारतीय श्रीपंच निर्वाणी अनी अखाड़े में पट्टा अभिषेक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास महाराज ने कहा कि संत परंपरा सनातन संस्कृति की रक्षक है और वैष्णव संतो ने सदैव ही धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण संवर्धन में अग्रणी भूमिका निभाई है। स्वामी रामदास महाराज एक विद्वान महापुरुष है जो जगद्गुरु पद पर आसीन होकर वैष्णव अखाड़ों की परंपराओं का निर्वहन करते हुए समाज को धर्म का संदेश प्रदान करेंगे। अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास एवं अखिल भारतीय श्रीपंच दिगंबर अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत कृष्णदास महाराज ने कहा कि संत महापुरुष सदैव ही समाज का मार्गदर्शन कर एक नई दिशा प्रदान करते हैं। संपूर्ण जगत को ज्ञान के प्रकाश से अलौकिक कर मानव मात्र के कल्याण का रास्ता प्रशस्त करने वाले संत सभी के प्रेरणा स्रोत होते हैं। स्वामी रामदास महाराज एक महान संत है।ं जिन्होंने जीवन पर्यंत मानव सेवा का संदेश देकर युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाया है। निर्वाणी अखाड़ा के राष्ट्रीय महासचिव महंत गौरी शंकर दास महाराज ने कहा कि संत परंपरा संपूर्ण विश्व में भारत को महान बनाती है। स्वामी रामदास महाराज से समस्त बैरागी समाज यह आशा करता है कि वे परंपराओं का निर्वहन करते हुए वैष्णव संप्रदाय का मान बढ़ाएंगे। नवनियुक्त जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदास महाराज ने कहा कि जो दायित्व वैष्णव समाज द्वारा उन्हें सौंपा गया है। उसका वह पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करेंगे और धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण संवर्धन के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। इस दौरान महंत रामजी दास, महंत रामशरण दास, महंत नरेंद्र दास, महंत महेश दास, नागा महंत सुखदेव मुनि, महामंडलेश्वर सांवरिया बाबा, श्रीमहंत अशोक दास, श्रीमहंत सुरेश दास, श्रीमहंत देवनाथ दास शास्त्री, महंत रामदास, महंत मोहन दास खाकी, महंत भगवान दास खाकी, महामंडलेश्वर सेवा दास, महामंडलेश्वर साध्वी साधना दास, महंत अमित दास, महंत अरुण दास, महंत प्रह्लाद दास, महंत सूरज दास, महंत गोपाल दास, महंत हरिदास, महंत नंदराम बाबा सहित बड़ी संख्या में संत महंत उपस्थित रहे।


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