शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिविर में भी कुंभ मेले का समापन

 

हरिद्वार। कुम्भ नगरी में चैत्र पूर्णिमा के शाही स्नान के बाद विधिवत रूप से कुंभ मेले का समापन भी हो गया है। चंडी टापू पर लगे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिविर में भी आज कुंभ मेले का समापन हो गया है। इस मौके पर सभी संतो द्वारा आज शाही स्नान नीलधारा में किया गया और गंगा पूजन के बाद पिछले 1 महीने से नीलधारा में आयोजित की जा रही गंगा आरती का भी समापन कर दिया गया, धर्म ध्वजा का वंदन के उसे उतारा गया, दंडी स्वामियों का समष्टि भंडारा करके कुम्भ मेले के समापन की विधिवत घोषणा की गई, कुम्भ मेले के समापन के मौके पर शंकराचार्य जी के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि जब गुरु कुम्भ राशि में होते हैं और सूर्य मेष राशि में होते हैं तब हरिद्वार में कुंभ मेला होता है। उनके शिविर के द्वारा पिछले 1 महीने से नीलधारा में मां गंगा की नित्य संध्या आरती की जा रही थी जिसका आज विधिवत रूप से समापन कर दिया गया है साथ ही उन्होंने कहा कि आज उनके द्वारा दंडी स्वामियों के भंडारा कर मेले का समापन कर दिया है। अब वे यहां से प्रस्थान कर रहे हैं । इस मौके पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उत्तराखंड के जो पहले मुख्यमंत्री थे उन्होंने यह निर्णय लिया था कि हम परंपरागत कुम्भ नहीं होने देंगे और कुंभ मेले को लेकर वह नई व्यवस्था बना रहे थे, जो बन नहीं पाई और उन्हें ही जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि लोग अभी भी परंपराओं से प्यार करते हैं नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इसे समझा, उन्होंने साधु-संतों को शिविर के लिए भूमि दी और अन्य सुविधा भी उपलब्ध कराई, उनकी सूझबूझ से आज कुम्भ मेला सकुशल संपन्न हुआ है ,अगर पुराने वाले मुख्यमंत्री के हिसाब से मेला होता तो यहां पर लड़ाई झगड़े होते, उन्होंने मेले में अच्छी व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के साथ-साथ मेला प्रशासन की भी सराहना की है।


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