कुम्भ सनातनी संस्कृति का सबसे बड़़ा पर्व,लेकिन प्रशासन ने स्वरूप बदल दिया है

 

हरिद्वार। ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि कुंभ मेला नहीं बल्कि यह सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्व है और इसे इसी रूप में आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुंभ आयोजन को लेकर सरकार गंभीर नहीं रही ,यही कारण है कि अभी तक तैयारियां पूर्ण नहीं की जा सकी है। कुंभ शिविर से जारी प्रेस को एक बयान में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि कुंभ पर्व हमारी सनातनी संस्कृति का सबसे बड़ा पर्व है, लेकिन शासन प्रशासन ने इसे मेले का नाम देकर इसके स्वरूप को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि पर्वको पर्व ही रहने दिया जाय। उन्होंने इस बात पर भी अपनी असहमति जताई कि कुंभ आयोजन के लिए अंग्रेजी तारीख का चयन कर कुंभ की अधिसूचना जारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि आखिर अंग्रेजी तारीख 1 अप्रैल ही कुंभ की अधिसूचना जारी करने के लिए क्यों तय की गई। इसके लिए हिंदू सनातनी परंपरानुसार समय व तिथि का निर्धारण किया जाना चाहिए। शिविर क्षेत्र में पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि समय पर सुविधाएं नहीं जुटाई गई,जिससे कुंभ के लिए आए श्रद्धालुओ को असुविधा हो रही है।