नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी को दस वर्ष की कठोर कारावास की सजा

 हरिद्वार। नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और लैंगिक हमला करने के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष कोर्ट/एडीजे न्यायाधीश पारुल गैरोला ने आरोपी युवक को दोषी करार दिया है। विशेष कोर्ट ने दोषी को 10 वर्ष की कठोर कैद और 60 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। शासकीय अधिवक्ता भूपेंद्र कुमार चैहान ने बताया कि 17 सितंबर 2018 को ज्वालापुर क्षेत्र में एक 16 वर्षीय नाबालिग से घर पर दुष्कर्म किया गया था। घटना के वक्त पीड़ित घर पर अकेली थी। पीड़ित की मां सिडकुल में नौकरी करने और उसके तीनों भाई-बहन पिता के साथ गांव गए थे। पीड़ित ने आरोपी युवक को अपने घर का दरवाजा खोलने के लिए बुलाया था। जहां आरोपी युवक ने पीड़िता को घर पर अकेली पाकर उससे दुष्कर्म किया था। उसी दौरान पीड़ित लड़की का मामा वहां पहुंच गया था। जिस पर आरोपी युवक मकान की छत पर चला गया था। पीड़ित के मामा आरोपी युवक को पकड़ कर नीचे लाए थे। लेकिन आरोपी दीपक खुद को छुड़वाकर मौके से फरार हो गया था। इसके बाद ड्यूटी से घर लौटने पर पीड़ित ने घटना के बारे में अपनी मां को बताया था। शिकायतकर्ता ने आरोपी दीपक पर पीड़िता को जान से मारने की धमकी देने, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोपी दीपक भट्ट के खिलाफ विवेचना कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। विशेष कोर्ट ने आरोपी युवक पर जान से मारने की धमकी देने, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में आरोप तय किए थे। शासकीय अधिवक्ता ने सरकारी पक्ष की ओर से नौ गवाह पेश किए। मामले की सुनवाई के बाद फास्ट ट्रैक विशेष कोर्ट न्यायाधीश पारुल गैरोला ने आरोपी दीपक भट्ट को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 60 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि आरोपी युवक को जान से मारने की धमकी देने के मामले में ठोस साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है।


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