सात सन्यासी अखाड़ो में से पांच ने कुम्भ विसर्जन की घोषणा के बाद बैरागी अखाड़ो पर बढा दबाव

 

हरिद्वार। कुम्भ मेला 2021 के मुख्य शाही स्नान सम्पन्न होने के बाद से ही आशंकाओं के अनुरूप शासन भले ही कुम्भ मेला अवधि को न घटाये,लेकिन सन्यासी अखाड़ों में अधिकत्तर ने कुम्भ मेला समापन की घोषणा करते हुए बैरागी एवं उदासीन अखाड़ो पर दबाव बढ़ा दी है। बैरागी के तीनों अखाड़ो की ओर से कुम्भ समापन किये जाने की घोषणा पर सख्त इतराज जताते हुए दावा किया है कि 27 अप्रैल चैत्र पूर्णिमा के मौके पर होने वाले चैथा शाही स्नान वो पूरी लाव-लश्कर के साथ करेंगे। कहा जा रहा है कि मेला प्रशासन भी अखाड़ो की ओर से जारी घोषणाओं को आाधार बनाकर कुम्भ मेला की अवधि को घटाने की सिफारिश कर सकती है। श्रीपंचायती निरंजनी अखाड़ा एवं श्रीपंचायती आनंद अखाड़ा के द्वारा कुम्भ विजर्सन के बाद शनिवार को सन्यासियों के सबसे बड़े अखाड़े श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा द्वारा कुम्भ विसर्जन किये जाने की घोषणा के साथ ही अब कुम्भ मेला को लेकर गतिरोध बढ़ चला है। जूना अखाड़ा द्वारा विसर्जन किये जाने के बाद सात सन्यासी अखाड़ों में दो रह गये है,इनमें से भी श्रीपंच अटल शम्भू अखाड़ा द्वारा भी विसर्जित किये जाने की अपुष्ट जानकारी है। तो केवल श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से ही घोषणा बाकी रह गयी है। जबकि तीनों बैरागी अखाड़ो के अलावा श्री बड़ा अखाड़ा उदासीन एवं नया अखाड़ा उदासीन के साथ श्रीनिर्मल अखाड़ा द्वारा 27 अप्रैल को होने वाले शाही स्नान में शामिल होने का लगातार दावा कर रहे है। शनिवार को जूना अखाड़ा के द्वारा विसर्जन की घोषणा के बाद उनके साथ स्नान करने वाले श्रीपंच अग्नि एवं श्रीपंचदशनाम आहवान के साथ साथ किन्नर अखाड़ों की ओर ेस भी कुम्भ मेला विसर्जित हो गया। इस बीच शनिवार को दिनभर कुम्भ मेला को सीमित करने की चर्चायें जारी रही, शासन की ओर से लगातार दावा किया जा रहा है कि कुम्भ मेला अवधि 30अप्रैल तक है। शनिवार को जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवध्ेाशानंद गिरि जी महाराज ने प्रधानमंत्री की अपील का वास्ता देते हुए कहा कि 27 अप्रैल के शाही स्नान में सन्यासी अखाड़े प्रतीकात्म तौर पर शामिल होंगे। वही धार्मिक जानकारों की माने तो चेत्र पूर्णिमा का शाही स्नान मुख्यतः बैरागियों एवं उदासीन अखाड़ो का है और इन्ही अखाड़ो के साधु संत पेशवाई निकालकर स्नान करने जाते है। शनिवार को प्रधानमंत्री की अपील का हवाला देते हुए जूना अखाड़े द्वारा कुम्भ विसर्जन की घोषणा के साथ ही अब बैरागी अखाड़ो पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वो भी कोरोना के सामुदायिक संक्रमण की संभावना को देखते हुए कुछ सकारात्मक निर्णय ले। हलांकि बैरागी अखाड़ो की ओर से शनिवार को प्रधानमंत्री की अपील के बाद कोविड गाइड लाइन का पालन करने की बात कही है।


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