सनातन हिंदू धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा-श्रीमहंत राजेंद्रदास

 वैष्णव संतो का धरना तीसरे दिन भी जारी

हरिद्वार। बैरागी कैंप में तोड़े गए तीनो वैष्णव अणि अखाड़ों के मन्दिरों एवं संत निवास के पुर्ननिर्माण की मांग को लेकर वैष्णव संतों का धरना लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। मंगलवार को श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन व नया उदासीन व नाथ सम्प्रदाय के संतों के अलावा कई स्थानीय संतों ने धरने पर पहुंचकर बैरागी अनी अखाड़ों को अपना समर्थन प्रदान किया। धरने पर बैठे वैष्णव अखाड़ों के संतो की मांग है कि मुख्यमंत्री की सहमति व सरकार से मिले धन से किए जा रहे संत निवास व मंदिरों को तोड़ने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और तोड़े गए संत निवास व मंदिरों का पुर्ननिर्माण कराया जाए। धरने को संबोधित करते हुए श्रीपंच निर्वाणी अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास महाराज ने कहा कि संत निवास व मंदिर तोड़कर जिस प्रकार हिंदू धर्म पर कुठाराघात किया गया। वह अक्षम्य है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बैरागी संतों के साथ हरिद्वार में किए गए अन्याय के खिलाफ देश भर में आंदोलन किया जाएगा। श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्रदास महाराज ने कहा कि प्राचीन काल से ही कुंभ मेले में वैष्णव अखाड़ों व खालसों के शिविर बैरागी कैंप में ही स्थापित होते आए हैं। यह सब सरकारी दस्तावेजों में भी दर्ज है। लेकिन वैष्णव अखाड़ों द्वारा बैरागी कैंप की भूमि पर कराए जा रहे संत निवास के निर्माण व पूर्व से स्थापित मंदिरों को अतिक्रमण बताकर तोड़ दिया गया। लेकिन बैरागी कैंप में ही अतिक्रमण कर किए गए अन्य अवैध निर्माण को अनदेखा कर सरकार व प्रशासन ने केवल वैष्णव अखाड़ों पर कार्रवाई की है। हनुमान मंदिरों को तोड़कर सनातन हिंदू धर्म का अपमान किया गया। हिंदू धर्म के इस अपमान के खिलाफ जल्द ही देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संत तीन दिन से धरने पर बैठे हैं। लेकिन सरकार के किसी प्रतिनिधि या अधिकारी ने अब तक सुध नहीं ली। श्रीपंच दिगम्बर अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत कृष्णदास महाराज ने कहा कि केंद्र व राज्य हिंदूवादी सरकार के होते संतों व सनातन धर्म का उत्पीड़न कतई सहन नहीं किया जाएगा। श्रीमहंत रामजीदास, महंत विष्णुदास व महंत रघुवीर दास महाराज ने कहा कि बैरागी कैम्प में तीनों वैष्णव अनी अखाड़ों द्वारा बनाए जा रहे संत निवास व मन्दिरों को तोड़कर हिंदू धर्म का अपमान किया गया। इसे कतई सहन नहीं किया जाएगा। इस दौरान महंत महेशदास, महंत नरेंद्र दास, महंत संत रामसेवक दास, महंत दुर्गादास, महंत विष्णुदास, महंत भगवान दास खाकी, महंत बिहारी शरण दास, महंत नारायण दास पटवारी, महंत सूरज दास, महंत प्रहलाद दास, महंत अगस्त दास, नीलेश्वर मंदिर के परमाध्यक्ष महंत प्रेमदास, महंत भगवान दास खाकी, महंत मनीष दास, महंत रामदास, महंत गजेंद्र दास, महंत पदमदास नागा, महंत सूरज दास, महंत राजेंद्रदास, महंत ब्रहमाण्ड गुरू अनन्त महाप्रभु, स्वामी प्रकाशानंद, महंत अंकित दास, सुरेश अवस्थी, करन शर्मा, दिवाकर शर्मा, विशाल शर्मा, पंकज दास, लक्ष्य शर्मा आदि मौजूद रहे। 


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