Skip to main content

महिंद्रा एंड महिंद्रा ने जिला प्रशासन को सौंपी तीन एम्बुलेंस

 

हरिद्वार। कोरोना काल मे सिडकुल में स्थापित कई कंपनियां जिला प्रशासन का सहयोग कर रही है। प्रदेश में कोरोना महामारी की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने महिन्द्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन आनंद महिंद्रा से वार्ता कर सहयोग की बात की थी। कोविड मरीजों की मदद के उद्देश्य से महिंद्रा ग्रुप की महिन्द्रा फाइनेंस कम्पनी के सौजन्य से उत्तराखंड के लिए 3 एम्बुलेंस मुहैया करायी गयी। शनिवार को जिलाधिकारी सी.रविशंकर के निवास स्थान पर महिंद्रा एंड महिंद्रा हरिद्वार इकाई के प्लांट हेड सत्यवीर सिंह ने 3 एंबुलेंस जिलाधिकारी हरिद्वार को सोंपी। इस अवसर पर सीएमओ एस.के.झा भी मौजूद रहे। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि 2 एम्बुलेंस सीएमओ हरिद्वार के नाम पर जबकि 1 सीएमओ नैनीताल के नाम पर रजिस्टर्ड करवाई गई है। जिलाधिकारी सी.रविशंकर ने तीनों एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जिलाधिकारी सी.रविशंकर ने इसके लिए कंपनी प्रबंधन का आभार व्यक्त किया और बताया कि इनमें से दो एम्बुलेंस हरिद्वार और एक एम्बुलेंस नैनीताल जिले में भेजी जाएगी। जनसंख्या की दृष्टि से हरिद्वार घनी आबादी वाला जिला है और कोरोना काल मे ये एम्बुलेंस बहुत मददगार साबित होंगी। वही महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी के प्लांट हेड सत्यवीर सिंह ने कहा कि कोरोना की पहली लहर से ही हरिद्वार जिलाधिकारी और सिडकुल के आरएम के साथ पहले भी कंपनी ने काफी सहयोग किया है। अब दूसरी लहर में उनके द्वारा प्रशासन के सहयोग के लिए तीन एम्बुलेंस दी जा रही है। निश्चित रूप से कोरोना के खिलाफ जंग में कंपनी प्रशासन का सहयोग आगे भी करती रहेगी। इस अवसर पर कम्पनी की ओर से शिरोमणि त्रिपाठी, अजय वर्मा, धर्मेंद्र रावत, सुरेश कुमार, दीपक चैधरी, विश्वजीत सिंह, शोभित जैन, नेत्रपाल, गोबिंद नाभियाल, जगमोहन सिंह, मोहित भोला व महिन्द्रा फाइनेंस से मोहनिश व सिडकुल एसोसिएशन से हिमेश कपूर, अरुण सारस्वत व सिडकुल के रीजनल मैनेजर भी मौजूद रहे। 


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक