मां से मिले संस्कारों से ही व्यक्ति योग्य बनता है-म.म.स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरी

हरिद्वार। चेतन ज्योति आश्रम में स्वामी ऋषिश्वरानन्द महाराज के सानिध्य में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में संत समाज ने स्वामी आनन्द गिरी महाराज की माता स्वर्गीय नानू देवी चोटिया को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। ब्रह्मलीन माता नानू देवी चोटिया को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए चेतन ज्योति आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ऋषिश्वरानन्द महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में मां का दर्जा सर्वोपरि है। मां ही प्रथम शिक्षक की भूमिका निभाते हुए बालक का व्यक्तित्व विकास करती है। ब्रह्मलीन माता नानू देवी चोटिया मिले ज्ञान व संस्कार के चलते स्वामी आनन्द गिरी महाराज सनातन धर्म व संस्कृति का प्रचार प्रसार करने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द गिरी महाराज ने कहा कि व्यक्ति माता के ऋण से कभी ऊऋण नहीं हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को संवारने में मां की भूमिका सबसे अहम होती है। समाज का मार्गदर्शन करने वाले स्वामी आनन्द गिरी जैसे होनहार संत को जन्म देने वाली ब्रह्मलीन माता नानू देवी चोटिया धन्य हैं। पूर्व पालिका चेयरमैन सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि संसार में मां से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। मां के आशीर्वाद व शिक्षाओं से ही बालक का सर्वागींण विकास होता है। सनातन धर्म व संस्कृति में मां को देवी का दर्जा दिया गया है। देवी स्वरूपा ब्रह्मलीन माता नानू देवी चेटिया ममता व वातसल्य की साक्षात प्रतिमा थी। अपनी माता से मिली प्रेरणा व संस्कारों के चलते स्वामी आनन्द गिरी महाराज ने समाज कल्याण के लिए सन्यास का मार्ग अपनाया। बाबा हठयोगी व महंत विष्णुदास ने कहा कि बालक को जन्म देने के बाद उसके जीवन को संवारने तथा सार्थक बनाने में मां की भूमिका अग्रणी होती है। श्रद्धांजलि समारोह की अध्यक्षता करते हुए महामण्डलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरी महाराज ने कहा कि मां के द्वारा प्रदान किए गए संस्कार अनमोल होते हैं। जिनके आधार पर ही व्यक्ति समाज में रहकर योग्यता प्राप्त करता है। स्वामी आनन्द गिरी महाराज अपनी पूज्य माता नानू देवी द्वारा प्राप्त संस्कारों से देश दुनिया में धर्म का प्रचार प्रसार कर भारतीय संस्कृति की पताका को फहरा रहे हैं। स्वामी आनन्द गिरी महाराज ने संत समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मां की सेवा व उनके प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए। आद्य जगद्गुरू शंकराचार्य ने भी मां का अंतिम संस्कार कर परंपराओं का पालन किया था। उसी परंपरा का पालन करते हुए उन्होंने मां के प्रति अपना कर्तव्य निभाया है। संत समाज के आशीर्वाद व मां से मिली शिक्षाओं के अनुरूप देश व समाज सेवा में अपना योगदान देते रहेंगे। मंच संचालन स्वामी रविदेव शास्त्री ने किया। इस अवसर पर स्वामी ज्ञानानन्द, स्वामी कामेश्वर पुरी, महंत विष्णुदास, महंत प्रेमदास, महंत दुर्गादास, महंत प्रह्लाद दास, महंत महावीर दास, निरंजन स्वामी, मंत सुतीक्ष्ण मुनि, महंत शिवानंद, महंत राजेंद्रदास, महंत देवेंद्र तोमर, स्वामी कृष्णानन्द, स्वामी राजेंद्रानन्द, महंत सूरज दास, स्वामी हरिवल्लभदास शास्त्री महंत दिनेश दास, स्वामी सत्यव्रतानंद, महंत सुमित दास, स्वामी हरिहरानन्द आदि सहित तमाम संतो ने माता नानू देवी को ममता की प्रतिमूर्ति बताते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।


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