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गंगा दशहरा के मौके पर श्रद्वालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी,हर की पैड़ी रहा बंद

 

हरिद्वार। गंगा दशहरा के मौके पर हर की पैड़ी पर प्रतिबंध के कारण बड़ी संख्या में श्रद्वालुओं ने अन्य गंगा घाटों पर डुबकी लगाते हुए पूजा अर्चना की। इस मौके पर स्थानीय लोगों के साथ ही तीर्थ पुरोहित और श्रीगंगा सभा के पदाधिकारियों ने हरकी पैड़ी पर गंगा दशहरा का सांकेतिक स्नान किया। पुलिस की सख्ती के कारण यात्रियों ने हरकी पैड़ी के आसपास के गंगा घाट सुभाष घाट, कांगड़ा घाट, पंतद्वीप पार्किंग के आसपास गंगा घाटों पर स्नान किया। गंगा दशहरा स्नान पर धर्मनगरी में जगह जगह भीड़ दिखाई दी। ज्ञात रहे कि गंगा दशहरा एवं निर्जला एकादशी पर गंगा स्नान पर पुलिस प्रशासन ने कोविड कफ्रयू के कारण रोक लगा दी थी। अन्य स्थानों से गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्वालुओं को पूर्व में नही आने की अपील एसएसपी की ओर की गयी। इसके बावजूद गंगा दशहरा के स्नान पर हरिद्वार की सीमाएं सील होने के बावजूद हजारों यात्री हरिद्वार पहुंच गए। यात्रियों के लिए हरकी पैड़ी को बैरियर लगाकर सील करना पड़ा। हालांकि सुबह भीड़ होने पर हरकी पैड़ी को खाली कराया गया। मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन ही पतित पावनी मॉ गंगा राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के बाद पृथ्वी पर आई थी । ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दसवी तिथि व हस्त नक्षत्र मे गंगा का पृथ्वी पर आगमन हुआ। कोरोना महामारी के चलते प्रशासन की सख्ती के कारण हरिद्वार में गंगा दशहरा गंगा पर हर की पैड़ी के ब्रह्मकुंड क्षेत्र में तो श्रद्धालु नही पहुंच पाए लेकिन आस पास के घाटों पर डुबकी अवश्य लगाई। गंगा दशहरा पर्व पर लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते थे लेकिन इस बार हरकी पैड़ी श्रद्धालु विहीन रही। स्थानीय कुछ लोग अवश्य हर की पैड़ी पहुंचे और आस पास के गंगा घाटों पर गंगा स्नान किया लेकिन ब्रह्मकुंड पर गंगा स्नान नही कर पाए, कोरोना संकट के चलते हरकी पैड़ी के ब्रह्मकुंड क्षेत्र को सील किया गया है। पंडित प्रतीक मिश्रपूरी बताते हैं कि मान्यता है कि आज के दिन माँ गंगा स्वर्गलोक से पृथ्वी पर अवतरित हुई थी तभी से इस  दिन को गंगा दशहरा के नाम से मनाया जाने लगा मान्यता है कि इस दिन दान पुण्य का काफी महत्व माना जाता है। शास्त्रो मे कहा गया है कि आज के दिन गंगा स्नान कर दान पुण्य करने से मानव को मोक्ष की प्राप्ती होती है आज के दिन पितृ तर्पण का भी विशेष महत्व बताया गया है साथ ही आज के दस प्रकार का सिंगार मां गंगा को भेट किया जाता है। आज के दिन 10 ब्राह्मणों को भोज कराने का भी महत्व है क्योंकि जब मां गंगा धरती पर आई थी तब 10 प्रकार के विशेष योग बन रहे थे। वही कुछ श्रद्धालुओं का कहना था कि अब जिस तरह से कोरोना के मामले कम होते जा रहे हैं तो ऐसे में अब नियमों में भी ढील दी जानी चाहिए जिससे लोग हर की पौड़ी पर मां गंगा में स्नान कर सके। हरकी पैड़ी को आने वाले रास्तों पर यात्रियों के लिए बैरियर लगाये गए थे। हाथी पुल, न्यू संजय पुल, भीमगोड़ा बैरियर, पोस्ट ऑफिस, कांगड़ा घाट, अस्थि प्रवाह घाट समेत अन्य जगह पुलिस ने बैरियर लगाकर यात्रियों को रोका। सीसीआर टॉवर के पास शिव सेतु पर बैरियर लगाने पर यात्रियों की पुलिस ने नोकझोंक भी हुई। बारिश के बीच यात्री हरकी पैड़ी जाने की जिद कर रहे थे। सुबह से ही एसडीएम और सीओ सिटी अभय प्रताप सिंह हरकी पैड़ी पर डटे रहे। 


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