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सेंटर फार एरोमेटिक व गुकाविवि के बीच एमयूओ पर हस्ताक्षर

 हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय और सेंटर फार एरोमेटिक प्लांटस उत्तराखंड आने वाले समय में क्षेत्रीय औषधीय वनस्पति के सुगंधित पौधों पर अनुसंधान के क्षेत्र में मिलकर कार्य करेंगे। इससे जहां एक तरफ हमारे सुदूर क्षेत्रों में होने वाली वनस्पतीय पौधों की सुगंधीय गुणों का लाभ आम जनता तक पहुंचेगा वहीं, दूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को भी बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। बुधवार को इस दिशा में गुरुकुल कांगड़ी के कुलपति प्रो. रूपकिशोर शास्त्री व सेंटर फार एरोमेटिक प्लांटस के निदेशक निपेंद्र सिंह चैहान ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। निपेंद्र सिंह चैहान ने बताया कि उत्तराखंड सरकार का यह उपक्रम प्रदेश में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले सुगंधीय पौधों पर अनुसंधान के क्षेत्र में डेढ़ दशक से अधिक समय से महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। गुरुकुल कांगड़ी के साथ मिलकर इस दिशा में और तेज गति से अनुसंधान के कार्यों को किया जाएगा। जिसके चलते यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे शोध छात्रों को हमारे संस्थान द्वारा सुदूर क्षेत्रों में शोध अनुसंधान के अवसर उपलब्ध कराए जायेंगे। दोनों संस्थान मिलकर गहन शोध कार्य कर प्रदेश में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करेंगे। कुलपति प्रो. रूपकिशोर शास्त्री ने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी हमेशा से उत्कृष्ट शोध कार्यों में अग्रसर रहा है। इस एमओयू के होने से निश्चय ही हमारे शोध छात्रों को शोध के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। इस अवसर पर कुलसचिव डा. सुनील कुमार, आयुर्वेद एवं आयुर्विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. आरसी दुबे, प्रो. वीके सिंह, प्रो. सत्येन्द्र राजपूत आदि शामिल रहे।


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गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

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आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

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