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राजनीति को सेवा का माध्यम मानकर उन्होंने युवाओं को प्रेरणा दी-विशाल गर्ग

 हरिद्वार। वैश्य बंधु समाज मध्य हरिद्वार के अध्यक्ष डा.विशाल गर्ग ने प्रैस बयान जारी करते हुए कहा कि पूर्व विधायक अंबरीष कुमार के निधन से वैश्य समाज को अपूर्णीय क्षति हुई है। जिसकी पूर्ति मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीति को सेवा का माध्यम मानकर उन्होंने युवाओं को प्रेरणा दी। विलक्षण राजनीतिक प्रतिभा के धनी पूर्व विधायक अंबरीष कुमार ने सभी वर्गो के दुख दर्द में हमेशा अग्रणी भूमिका निभायी। अंबरीष कुमार सदैव ही मजदूरों, किसानों की समस्याओं को लेकर संघर्ष करते रहे। समय समय पर धर्मनगरी में सौहार्द एकता का माहौल बनाने में उनके योगदान की जितनी भी प्रशंसा की जाए। उतना कम है। कर्मठ, ईमानदार, साफ छवि के नेता अंबरीष कुमार हमेशा ही धर्मनगरी के लोगों के प्रिय रहे। युवा वर्ग का लगाव हमेशा ही अंबरीष कुमार से रहा। उन्होंने राजनीतिक संघर्ष में हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विकास के नए आयाम रचने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उनकी योग्यता एवं बौद्धिक क्षमता का प्रदेश के सभी राजनीतिक दल लोहा मानते थे। राजनीति एवं प्रशासन के संबध में उनका ज्ञान विलक्षण था। हरिद्वार के कई युवाओं ने उनके सानिध्य में ही राजनीतिक सफर की शुरूआत की। पांच दशक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया। उ.प्र विधानसभा के श्रेष्ठ विधायक चुने गए अंबरीष कुमार ने हरिद्वार के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हरिद्वार की राजनीति में एक विशिष्ट पहचान रखने वाले अंबरीष कुमार के निधन से वैश्य समाज को भी गहरा आघात लगा है। उनके निधन से हरिद्वार व उत्तराखण्ड की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया है। ईश्वर व मां गंगा उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दे।   


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गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक