Skip to main content

वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश प्रताप राणा के कार्यालय पर फहराया गया तिरंगा

 हरिद्वार। 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भेल रानीपुर क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश प्रताप राणा के कार्यालय पर समारोह का आयोजन कर तिरंगा फहराया गया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सरदार नारायण सिंह तथा मुख्य अतिथि वयोवृद्ध कांग्रेस नेता शोभन सिंह रावत ने ध्वजारोहण किया। कार्यक्रम में देश भक्ति से ओतप्रोत कविताओं का पाठ करने के अलावा दिवंगत कांग्रेस नेताओं पूर्व विधायक अंबरीष कुमार, स्वर्गीय खालिद जहिर, नन्दन सिंह बिष्ट, एसके शक्करवाल, दिनेश सलोनिया को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। ब्लाक कांग्रेस बीएचईएल अध्यक्ष गुलबीर सिंह ने सबका स्वागत किया। इस दौरान महेश प्रताप राणा ने कहा कि लंबे संघर्ष कुर्बानियों के बाद मिली आजादी को बनाए रखते हुए शहीदों के सपनों को साकार करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। कार्यक्रम मे पूर्व विधायक रामयश सिंह, पूर्व राज्य मंत्री डॉ. संजय पालीवाल ,महिला कांग्रेस अध्यक्ष बिमला पांडे ,पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष अंजू द्विवेदी, पूर्व राज्य मंत्री नईम कुरैशी, युवा पार्षद सुहैल अख्तर कुरैशी, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष प्रदीप चैधरी, व्यापार मंडल अध्यक्ष विभाष सिन्हा,पंचायत सदस्य रोशनलाल,बहादुर सिंह पंवार,पूर्व पार्षद धर्मपाल ठेकेदार,नगरपालिका संयोजक अशोक उपाध्याय,अमर दीप रोशन, पूर्व कांग्रेस उपाध्यक्ष सी पी सिंह, कम्युनिस्ट पार्टी के एम एस त्यागी,युवा नेता प्रीतम बर्मन,श्रमिक नेता भाई विकास सिंह,सरदार सुरेन्द्र सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता गजे सिंह, ओ पी चैहान, अखिलेश मिश्रा,सुभाष नगर अध्यक्ष कैलाश प्रधान ,बी एस तेजियांन, पी एल कपिल, एनएसयुआई अध्यक्ष नीतिश कुमार ,सुगर यादव, आई टी अध्यक्ष सत्येंद्र वर्मा,मुकुल चैहान, हर्षित चैहान, वरिष्ठ नेता मनीराम बागडी, जगपाल सिंह , सतीश शर्मा,अंबिका पांडे,एए खान,एल एस रावत,विकास लांबा,सोनू प्रजापति,नईम खान, अनिल सैनी, आर एम अस्थाना, राहुल यादव, विजय पटेल,जी एस रावत सहित सैकडो कांग्रेसजन मौजूद रहे। 


Comments

Popular posts from this blog

गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक