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निरंजनी अखाड़े के महंत अंबिकापुरी के ब्रह्मलीन होने से संत समाज में शोक की लहर

 हरिद्वार। तपोनिधि श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के महंत अंबिकापुरी का निधन होने पर संत समाज में शोक की लहर दौड़ गयी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय श्रीमहंत नरेंद्र गिरी, निंरजन पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी, आनन्द पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी, निंरजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविन्द्रपुरी, श्रीमहंत रामरतन गिरी सहित तमाम संतों ने महंत अंबिकापुरी के ब्रह्मलीन होने पर गहरा दुख जताते मां गंगा से उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा कि महंत अंबिकापुरी का निधन संत समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है। त्याग व तपस्या की प्रतिमूर्ति ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी संत समाज में अत्यन्त लोकप्रिय थे। जीवन के अंतिम समय तक उन्होंने समाज और देश की सेवा में योगदान दिया। युवा संतों को उनके आदर्शो व दिखाए मार्ग पर चलते धर्म व देश की सेवा में योगदान करना चाहिए। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी संत समाज के प्रेरणास्रोत थे। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज को गहरा आघात लगा है। आनन्द पीठाधीश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म व भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा धर्म प्रचार में उल्लेखनीय योगदान करने वाले ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी सभी की स्मृतियो में सदैव जीवंत रहेंगें। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए मानव कल्याण में योगदान करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविन्द्रपुरी व श्रीमहंत रामरतन गिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी तपस्वी संत थे। निर्मल पीठाधीश्वर श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज व कोठारी महंत जसविन्दर सिंह महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी संत समाज के प्रेरणा स्रोत थे। मां गंगा उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दे। महंत गंगापुरी व स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि मानव सेवा व सनातन धर्म के संरक्षण संवर्द्धन में मधुरभाषी और सरल स्वभाव के संत ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी ने सदैव अतुलनीय योगदान किया। श्रीमहंत राजेंद्रदास, श्रीमहंत धर्मदास, श्रीमहंत रामकिशोर दास, महंत गोविन्ददास, महंत निर्मल दास, महंत दामोदरशरण दास, स्वामी आशुतोष पुरी, स्वामी मधुरवन, स्वामी रविवन, जगद्गुरू स्वामी अयोध्याचार्य महाराज, महंत रघुवीर दास, महंत विष्णुदास, म.म.स्वामी रामेश्वरानन्द सरस्वती, महंत देवानंद सरस्वती, महंत ललितानंद गिरी, म.म.स्वामी हरिचेतनानंद, महंत दामोदर दास, स्वामी कपिल मुनि,महंत प्रेमदास, स्वामी राजेंद्रानंद, महंत साधनानंद, स्वामी ऋषि रामकृष्ण, स्वामी शिवानंद,स्वामी रविदेव शास्त्री,स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास सहित तमाम संतों ने ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी को दिव्य संत बताते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। 


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