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श्रावणी कर्म शुद्धि का सर्वाेत्तम साधन-सतपाल ब्रह्मचारी

 

हरिद्वार। श्री पंच अग्नि अखाड़े के श्रीमहंत एवं सिद्ध पीठ चंडीकेश्वर के अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि श्रावणी कर्म शुद्धि का सर्वाेत्तम साधन है। एक ब्राह्मण के लिए यह कर्म सबसे बड़ा वरदान है। इसे उपाक्रम भी कहते हैं। यह प्राचीन शास्त्र संगत परंपरा है। रविवार को सिद्ध पीठ चंडीकेश्वर महादेव में आयोजित श्रावणी कर्म कार्यक्रम के दौरान सतपाल ब्रह्मचारी के नेतृत्व में विधि विधान के साथ ब्राह्मणों द्वारा पूर्णाहुति दी गई। इस दौरान विश्व कल्याण की कामना करते हुए कोरोना महामारी से देश को जल्द मुक्ति देने की विशेष प्रार्थना की गई। सतपाल ब्रह्मचारी ने बताया कि एक माह पहले भगवान शंकर के रुद्राभिषेक कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया था। मुख्य यजमान नितिन त्यागी रहे। जबकि पंडित पंकज पंत, आचार्य अमरीश काला, वेद पाठी मयूर गौड़, सुरेश शास्त्री, नरेश, डा.विनोद डोगरा, जेपी पांडे, वेदपाठी प्रांशु द्विवेदी, गुरुप्रसाद सेमवाल आदि ब्राह्मणों द्वारा श्रावणी कर्म किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि इसे उपाक्रम भी कहते हैं। यह प्राचीन शास्त्र संगत परंपरा है। इसका लोप कभी नहीं होने दें। इसके लोप से हमारी संस्कृति और संवर्द्धन लुप्त हो जाएगा। हर ब्राह्मण को यज्ञोपवित करना चाहिए। इस मौके पर ब्राह्मणों ने श्रावणी कर्म के तहत सूर्य को अघ्र्य देकर ऋषियों का पूजन किया। ब्राह्मणों ने तर्पण, जनेऊ परिवर्तन के बाद हवन के साथ श्रावणी उपाकर्म किया। उन्होंने कहा कि वर्ष में एक बार पंच द्रव्य का सेवन करते हैं तो यह सुरक्षा करता है। पंच द्रव्य में गाय का घी, गाय का दूध, गाय का मूत्र, गाय का गोबर और दही शामिल है। इन्हें एक निश्चित अनुपात में मिलाकर सालभर तक सुरक्षित रह सकते हैं। इस दौरान चंडीकेश्वर महादेव पीठ के उपाध्यक्ष मुकेश त्यागी, ओम पहलवान आदि मौजूद रहे।


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गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

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आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

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