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चेक बाउंस के मामले में छह महीने की कारावास सजा,10लाख 75हजार का अर्थदंड

 हरिद्वार। उधार ली गई धनराशि नहीं चुकाने के मामले में द्वितीय न्यायिक मजिस्ट्रेट पारुल थपलियाल ने एक व्यक्ति को दोषी पाया है। कोर्ट ने उसे छह माह के कारावास और 10 लाख 75 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अधिवक्ता तरसेम सिंह चैहान ने बताया कि ग्राम बादशाहपुर पथरी निवासी शिकायतकर्ता रविन्द्र कुमार सैनी ने सती घाट कनखल निवासी प्रद्युम्न अग्रवाल पुत्र अमरनाथ के खिलाफ चेक बाउंस की शिकायत दायर की थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि सात नवम्बर 2012 में अच्छी जान पहचान के चलते प्रद्यूम्न अग्रवाल ने अपने व्यापार के लिए 10 लाख रुपये उधार की मांग की। जिसपर शिकायतकर्ता ने पुरानी जान पहचान के नाते आठ लाख रुपये का एक चेक भरकर और दो लाख रुपये नगद दिए थे। तय अवधि के बाद शिकायतकर्ता रविंद्र सैनी ने उससे अपने उधार दी गई धनराशि 10 लाख रुपये लौटाने की मांग की थी। तब प्रदूम्न अग्रवाल ने शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपये चुकाने के लिए एक चेक भरकर अपने हस्ताक्षर कर दिया था। शिकायत कर्ता ने उक्त चेक को भुगतान करने के लिए अपने बैंक खाते में प्रस्तुत किया था। बैंक कर्मचारी ने प्रदूम्न अग्रवाल के खाते में पर्याप्त धनराशि न होने पर चेक बिना भुगतान के लौटा दिया था। शिकायतकर्ता ने उसे एक डिमांड नोटिस भेजकर अपने उधार दिए गए पैसे की मांग की। लेकिन इसके बावजूद प्रदूम्न अग्रवाल ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया था। थक हारकर शिकायतकर्ता ने कोर्ट की शरण ली थी।


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