Skip to main content

कैम्प लगाकर लोगों को जागरूक कर विभिन्न योजनाओं की जानकारी दे-अपर जिलाधिकारी


 हरिद्वार। जिला स्तरीय समीक्षा समिति जिला सलाहकार समिति की संयुक्त बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व बीर सिंह बुद्वियाल ने बैंको से ऋण जमा अनुपात बढ़ाने के निर्देश दिए। कलेक्ट्रेट सभागार रोशनाबाद में आयोजित बैठक में लीड बैंक मैनेजर संजय संत ने बताया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के अन्तर्गत जनपद में योजना के प्रारम्भ से लेकर माह जून 2021 तक 7,85,540 बैंक खाते खोले जा चुके हैं, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अन्तर्गत 4,41,100 व्यक्तियों को बीमित किया जा चुका है,प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अन्तर्गत 1,30,564 व्यक्तियों को बीमित किया जा चुका है, अटल पेंशन योजना के अन्तर्गत 67,836 व्यक्तियों को पेंशन का लाभ दिया जा चुका है। श्री संत ने यह भी बताया कि जनपद में माह जून 2021 तक 88.11 प्रतिशत सक्रिय जमा खातों में आधार सीडिंग की जा चुकी है, जनपद में ऋण-जमा अनुपात का प्रतिशत 57.39 प्रतिशत है। अपर जिलाधिकारी ने लक्ष्यानुसार ऋण जमा अनुपात बढ़ाने के निर्देश दिये। लीड बैंक मैनेजर श्री संत ने बताया कि माह जून 2021 की स्थिति अनुसार जनपद का कृषि क्षेत्र अग्रिम कुल अग्रिम का 16.84 है, प्राथमिकता क्षेत्र अग्रिम कुल अग्रिम का 47.6 प्रतिशत तथा कमजोर वर्ग अग्रिम कुल अग्रिम का 17.2 प्रतिशत है। श्री सन्त ने बताया कि कृषकों की आय को वर्ष 2022 तक दोगुना किये जाने का लक्ष्य है, जिसके लिए कृषि गतिविधियों से संबंधित अधिक से अधिक ऋण वितरित किये जाने हैं। जनपद में 21858 (नए एवं नवीनीकरण) कृषि कार्ड बनाए गये हैं। प्रधान मंत्री रेहड़ी-पटरी आत्म निर्भर निधि के अन्तर्गत जनपद में विभिन्न बैंकों द्वारा 1144 ऋण आवेदन स्वीकृत किये गये हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत जनपद में विभिन्न बैंकों द्वारा 58 ऋण आवेदन स्वीकृत किये गये। अपर जिलाधिकारी ने निर्देश दिये कि इस संबंध में जो भी आवदेन लम्बित है, उन्हें एक सप्ताह में निष्पादित करें। इस संबंध में सहायक परियोजना निदेशक (एनआरएलएम) सुश्री नलनीत घिल्डियाल ने बताया कि कुछ बैंकों द्वारा ऋण आवेदनों के संदर्भ में आवश्यक सहयोग नहीं मिल रहा है, जिससे संबंधित योजनाओं की लक्ष्य पूर्ति मंे समस्या आ रही है, इस पर अपर जिलाधिकारी बीर सिंह बुदियाल ने कहा कि सभी बैंक एवं संबंधित विभाग आपसी समन्वय एवं सहयोग की भावना से कार्य करें, जिससे विभिन्न योजनाओं में राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति की जा सके। लीड बैंक मैनेजर संजय संत ने बैठक में बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत 25 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के अंतर्गत 13 ऋणियों द्वारा विभिन्न बैंकों को सीधे आवेदन प्राप्त हुए और सभी आवेदन स्वीकृत किये गये हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी अमन अनिरूद्ध ने बताया कि विभाग को 40 आवेदन और प्राप्त हुए हैं। श्री संत ने बैठक में लघु व मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), मुद्रा योजना, स्टैंडअप योजना आदि के बारे में भी जानकारी दी। बैठक में अपर जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों एवं बैंक प्रतिनिधियों को निर्देश दिये कि लाभार्थिंयों द्वारा किए गये आवेदनों को यदि निरस्त किया जाता है तो, निरस्त करने का कारण स्पष्ट रूप से उल्लेख करें, प्रकरणों को अधिक समय तक लम्बित न रखें तथा जल्द से जल्द लक्ष्यों की प्राप्ति का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि कैम्प लगाकर लोगों को जागरूक करें तथा विभिन्न योजनाओं की जानकारी देकर पात्र लाभार्थिंयों को आवेदन करवायें। बैठक में महाप्रबधन्क जिला उद्योग केन्द्र सुश्री पल्लवी गुप्ता, मुख्य उद्यान अधिकारी नरेन्द्र यादव, जिला पर्यटन अधिकारी श्रीमती सीमा नौटियाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी योगेश भारद्वाज, सहायक निदेशक डेयरी पीयूष आर्य, आरबीआई प्रतिनिधि महेश सिंह, सर्किंल हैड पीएनबी विकल, एसबीआई प्रतिनिध नन्द किशोर, बंधन बैंक से मनीष कुमार यादव, बैंक ऑफ बड़ौदा से विपिन बिष्ट, बैंक ऑफ इंडिया से अजय कुमार भाष्कर, बैंक ऑफ महाराष्ट्र से रवि कुमार, कैनरा बैंक से अनेन्द्र सिंह, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया से कुणाल सहित विभिन्न बैंको के प्रतिनिधि व सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।


Comments

Popular posts from this blog

गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक