Skip to main content

पांच देशों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया

 


हरिद्वार। वीआईपी घाट पर ह्यूमन प्राइड संस्था एवं श्याम इंजीनियरिंग के संयुक्त संयोजन में व रामकृष्ण मिशन के स्वामी दयाधिपानंद की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में ह्यूमन प्राइड संस्था के चेयरमैन डा.राकेश गोयल एवं श्याम इंजीनियरिंग के डायरेक्टर डा.सुनील गुप्ता ने विभिन्न देशों से आए एंबेसडर व कार्यक्रम में उपस्थित उद्योगपतियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इसके साथ उत्तराखंड व हरिद्वार के उद्योगपतियों और समाज सेवा में अग्रणी लोगों को सम्मानित किया गया। विश्व शांति और एकता के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में आए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भारतीय संस्कृति के साथ हुए स्वागत की प्रशंसा की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गौरव गुप्ता चेयरमैन ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल ऑफ इंडिया,नवरत्न अग्रवाल चेयरमैन बीकानेर फूड्स, पवन कंसल चेयरमैन जगदंबा कटलरी,, विनोद वर्मा वाइस प्रेसिडेंट आदित्य बिरला ग्रुप, सहित 5 देशों के एम्बेसडर मोहम्मद सेनजिंग एंबेसी हेर्जेगोविना, डा.रोजर गोपाल( एंबेसी टोबैको) नेहात एमिनी एंबेसी नॉर्थ मैकएडोनिया कॉलबेली हर्वे एंबेसी बुर्किना फासो, कैटरीना जूंघवा किम एंबेसी रिपब्लिक सीरिया ने शिरकत की। इस दौरान जिला जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेट नरेश गोयल, उद्योगपति ललित नैयर, अश्वनी खुराना, पराग गुप्ता, रविंदर, पिंटू भाई, बंटी यादव (चेयरमैन नवादा ट्रेडिंग) भारतीय जनता पार्टी कनखल मंडल के अध्यक्ष मयंक गुप्ता, पार्षद एकता गुप्ता समाज सेविका आरती नैयर, अवंतिका राणा, मीनाक्षी शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त रुप से मयंक भजोराम शर्मा व लक्षिका नैयर ने किया।


Comments

Popular posts from this blog

गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक