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विद्वान एवं तपस्वी संत थे ब्रह्मलीन बापू गोपालानंद ब्रह्मचारी-स्वामी कैलाशानंद

 


हरिद्वार। श्री पंच अग्नि अखाड़े के पूर्व सभापति ब्रह्मलीन बापू गोपालानंद ब्रह्मचारी महाराज की पुण्यतिथि सभी 13 अखाड़ों के सानिध्य में मनाई गई। इस दौरान संत समाज ने जगजीतपुर स्थित श्री आद्यशक्ति महाकाली आश्रम में बापू गोपालानंद ब्रह्मचारी महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें महान संत बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन पूज्य गुरुदेव स्वामी गोपालानंद ब्रह्मचारी महाराज एक विद्वान एवं तपस्वी संत थे। जिन्होंने सदा ही भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में अपना जीवन व्यतीत किया और अनेकों सेवा प्रकल्पों के माध्यम से समाज को सेवा का संदेश प्रदान किया। ऐसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर युवा संतो को राष्ट्र की एकता अखंडता बनाए रखने में अपना योगदान प्रदान करना चाहिए। अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन बापू गोपालानंद ब्रह्मचारी महाराज एक दिव्य महापुरुष थे। जिन्होंने जीवन पर्यंत अखाड़ों की परंपराओं का निर्वहन करते हुए राष्ट्र को एक नई दिशा प्रदान की। उनके सानिध्य में अनेकों युवा संतो ने ज्ञान प्राप्त किया। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविन्दर सिंह महाराज ने कहा कि निर्मल जल के समान जीवन व्यतीत करने वाले ब्रह्मलीन स्वामी गोपालानंद ब्रह्मचारी महाराज एक महान संत व दिव्य विभूति थे। सनातन धर्म संस्कृति के उत्थान में उनका योगदान सदैव समाज को प्रेरित करता रहेगा। श्री पंच अग्नि अखाड़े के सचिव श्रीमहंत साधनानंद महाराज एवं स्वामी विवेकानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि महापुरुष केवल शरीर त्यागते हैं उनका प्रेरणादायक जीवन अनंत समय तक समाज को जागृत करता रहता है और ब्रह्मलीन स्वामी गोपालानंद ब्रह्मचारी महाराज तो साक्षात त्याग एवं तपस्या के प्रतिमूर्ति थे। ऐसे महापुरुषों को संत समाज नमन करता है। इस दौरान स्वामी अवंतिका नंद ब्रह्मचारी स्वामी, कृष्णानंद ब्रह्मचारी, पंडित प्रमोद पांडे, लाल बाबा, स्वामी अनुरागी महाराज, स्वामी रवि देव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, महंत बिहारी शरण, महंत रघुवीर दास, महंत सूरज दास, महंत प्रह्लाद दास, महंत मालाधारी, महंत गोविंद दास, स्वामी सत्यव्रतानंद सहित बड़ी संख्या में संत महापुरुष उपस्थित रहे।


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