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परिवर्तन यात्रा का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह किया स्वागत

हरिद्वार। दूसरे चरण में हरिद्वार पहुंची कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह स्वागत किया। हरिद्वार विधानसभा क्षेत्र में अंशुल श्रीकुंज, सुमित, जटाशंकर श्रीवास्तव, विभाष मिश्रा, नितिन कौशिक आदि के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रेमनगर आश्रम के समीप नारेबाजी के साथ परितर्वन यात्रा का जोरदार स्वागत किया। आर्यनगर चैक पर एडवोकेट फुरकान अली, इरफान भट्टी आदि के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। दुर्गाचैक पर पूर्व राज्य मंत्री मकबूल कुरैशी, पूर्व राज्यमंत्री नईम कुरैशी के नेतृत्व में असद महमूद,सुभान कुरैशी, अतीक चैधरी, अनीस, हाजी इमदाद, मुसर्रफ सैफी, छम्मन पीरजी, पार्षद इसरार अहमद, पार्षद सुहेल अख्तर, तस्लीम अहमद आदि कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। परिवर्तन यात्रा के शिवालिक नगर पहुंचने पर कांग्रेस प्रदेश सचिव महेश प्रताप राणा के संयोजन में कार्यकर्ताओं ने पुष्पवर्षा कर भव्य किया। महिला कांगे्रस जिला अध्यक्ष विमला पाण्डे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सैकड़ों महिला कांग्रेस पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने परिवर्तन यात्रा का स्वागत किया। अंशुल श्रीकुंज व जटाशंकर श्रीवास्तव ने कहा कि परिवर्तन यात्रा कांग्रेस के सत्ता में आने का मार्ग प्रशस्त करेगी। यात्रा में उमड़ी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ व उत्साह से साफ दिखाई दे रहा है कि लोग भाजपा को सत्ता से हटाना चाहते हैं। पूर्व राज्यमंत्री मकबूल कुरैशी व हाजी नईम कुरैशी ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार व प्रदेश की भाजपा सरकार जनता से किए वादे पूरे करने में नाकाम रही है। भाजपा सरकारों की गलत नीतियों के चलते देश की जनता परेशान है। महेश प्रताप राणा व विमला पाण्डे ने कहा कि भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, तीन काले कृषि कानून भाजपा सरकार के पतन का कारण बनेंगे। उन्होंने कहा कि परिवर्तन यात्रा में विशाल भीड़ दर्शा रही है कि केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों से जनता आजिज आ चुकी है। अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार निश्चित है। कांग्रेस भारी बहुमत से जीत दर्ज कर उत्तराखण्ड में सरकार बनाएगी और जन आंकाक्षाओं को पूरा करेगी। 


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गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक